चारण साहित्य का इतिहास – डॉ. मोहन लाल जिज्ञासु

| कड़ी – १६२ | सातवाँ अध्याय – आधुनिक काल (द्वितीय उत्थान)
| धारावाहिक श्रंखला – प्रत्येक मंगल, शुक्र एवं रविवार को प्रेषित
| सन्दर्भ – जीवनी खंड-सूर्यमल्ल मिश्रण

महान विभूतियों, विशेषत: कवियों की दैनिक चर्या बड़ी ही विचित्र होती हे और सूर्यमल्ल भी इसका अपवाद नहीं।[…]

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ભગવતી આઈ શ્રી વાનુમા – મોરઝર (भगवती आई श्री वानुमा मोरझर)

માતૃપૂજાની શરૂઆત તો સૃષ્ટિના પ્રારંભ સાથે જ થઈ હશે. ભારતમાં તો આદિકાળથી જ માતૃપૂજા થતી આવી છે.

વેદોમાં પણ જગદંબાને સર્વદેવોના અધિષ્ઠાત્રી, આધાર સ્વરૂપ સર્વને ધારણ કરનારા સચ્ચિદાનંદમયી શક્તિ સ્વરૂપે વર્ણવામાં આવ્યા છે.

લોકજીવનમાં પરંપરાગત શક્તિ-પૂજા સાથે ચારણો ના ઘેર જન્મ લેનાર શક્તિ અવતારોની પૂજાનું પણ વિશિષ્ટ અને મહત્ત્વપૂર્ણ સ્થાન છે.[…]

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नसीहत री निसाणी – जाल जी रतनू

किसी का बिन जाणिये, विश्वास न कीजै।
गैणा गांठा बेच के, अन सूंगा लीजै।
पढवाचा कीजै नही, बिन मौत मरीजै।
ठाकुर से हेत राखके, हिक दाम न दीजै।
भांग शराब अफीम का, कोई व्यसन न कीजै।
दुसमण की सौ बीनती, चित्त ऐक न दीजै।

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गीत कुशल जी रतनू रे वीरता रो बगसीराम जी रतनू रचित

राजस्थान मे चारण कवि ऐक हाथ मे कलम तथा दूसरे हाथ मे कृपाण रखते थे। महाराजा मानसिंह जी जोधपुर के कहे अनुसार रूपग कहण संभायो रूक। ऐक बार मानसिंह जी का भगोड़ा बिहारी दास खींची को भाटी शक्तिदान जी ने साथीण हवेली मे शरण दी, इस पर मान सिह जी ने क्रुद्ध होकर फोज भेज दी। शरणागत की रक्षा हेतु भाटी शक्तिदान जी ऐवं खेजड़ला ठाकुर सार्दुल सिंह जी ने सामना किया। इस जंग मे मेरे ग्राम चौपासणी के उग्रजी के सुपुत्र कुशल जी रतनू ने पांव मे गोली लगने के बाद भी युद्व किया।
उनकी वीरता पर तत्कालीन कवि बगसीराम जी रतनू ने निम्नलिखित डिंगल गीत लिखा जो यहाँ पेश है।

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राजस्थानी शब्दकोश ऑनलाइन प्रोजेक्ट – सामान्य प्रश्न अथवा जिज्ञासाएं (FAQs)

प्रश्न: डिजिटाइज़ करने और ऑनलाइन करने में क्या अंतर है? उत्तर: डिजिटाइज़ करने का का अर्थ है किसी भी पुस्तक अथवा रचना को इलेक्ट्रॉनिक फॉरमेट में बदलना और ऑनलाइन करने का अर्थ है इस पुस्तक के डिजिटल फॉरमेट को इन्टरनेट के माध्यम से आम जनता को उपलब्ध करवाना। यह डिजिटल फॉर्मेट एक पीडीऍफ़ फाइल की तरह भी हो सकता है जिसे कोई डाउनलोड कर ले तथा यह एक वेब पेज की तरह भी हो सकता है जिसे कोई भी बिना डाउनलोड किये सीधे ब्राउज़र पर ही पढ़ सके। प्रश्न: एक शब्दकोश को डिजिटाइज़/ऑनलाइन बनाना एक सामान्य पुस्तक से बहुत अधिक […]

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राजस्थानी शब्दकोश ऑनलाइन प्रोजेक्ट


प्रोजेक्ट उद्देश्य: सम्पूर्ण राजस्थानी शब्दकोश (लगभग 2,50,000 शब्द) को एक वर्ष में ऑनलाइन करके इसकी मोबाइल एप तथा वेबसाइट बनाना[…]

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अमर रहे गणतन्त्र हमारा – राजेश विद्रोही

भाई का दुश्मन है भाई
मन्दिर मस्जिद हाथापाई
हिन्दुस्तानी सिर्फ रह गये
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख इसाई
कौमी यकजहती रोती है
गया भाड़ में भाईचारा।
मगर हमें इन सब से क्या है
अमर रहे गणतंत्र हमारा।।[…]

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पुस्तक समीक्षा – प्रकृति-संस्कृति री ओपती सुकृति-‘रूंख रसायण’ – महेन्द्रसिंह सिसोदिया ‘छायण’

पुस्तक समीक्षा – प्रकृति-संस्कृति री ओपती सुकृति-‘रूंख रसायण’ – महेन्द्रसिंह सिसोदिया ‘छायण’
लेखक – डॉ. शक्तिदान कविया

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