कान्हड़दे सोनगरा – डॉ. गोविन्द सिंह राठौड़

[…]कान्हड़दे के कठोर और साहस भरे जवाब को पाकर अलाउद्दीन भली प्रकार समझ गया कि वह मेरी सेना को उसके राज्य में से सही-सलामत आगे नहीं जाने देगा। अत: उसने अपनी सेना को मेवाड़ के मार्ग से गुजरात भेजी। अलाउद्दीन की सेना जब गुजरात से वापस दिल्ली की ओर लौट रही थी तब अलाउद्दीन ने एक सेना उलूगखाँ के नेतृत्व में कान्हड़दे के द्वारा मार्ग न दिये जाने के कारण उसे दण्डित करने के लिये भेजी।[…]

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मृगया-मृगेन्द्र – महाकवि हिंगऴाजदान जी कविया

।।मृगया-मृगेन्द्र।।

।।रचना – महाकवि कविया श्रीहिंगऴाजदानजी।।

अथ मृगया-मृगेन्द्र लिख्यते

।।आर्य्या।।
गंडत्थल मढ लेखा, रजत रोलंभराजि गुंजारन
शोभित भाल सुधान्सु, नमो मेनकात्मजा वन्दन।।1
पर्वतराज की पुत्री के पुत्र गणेश को नमस्कार है जिनके कपोलों पर बहते मद की सुगंध से आकृष्ट हुए भौरों की गुंजार सदा रहती है और जिनके ललाट पर चन्द्रमा सुशोभित है।

।।दोहा।।
गनपति गवरि गिरीश गुरु, परमा पुरुष पुरान।
श्री सरस्वती करनी सकति, देहु उकति वरदान।।2
गणेश, गौर(पार्वती), महादेव, लक्ष्मी, विष्णु, सरस्वती, करणी माता, शक्ति मुझे उक्ति (काव्य रचना) का वर दान दे।
[…]

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ફેંસલો (फैसलो) – કવિ દુલા ભાયા કાગ (कवि दुला भाया ‘काग’) – छंद झूलणा

॥ ઝુલણાં છંદ ॥

લેખ કાગળ લખ્યાં તાત પ્રહલાદ ને, કાળ ને જીતવા કલમ ટાંકી ;
વર્ષો ના વર્ષ વિચાર કરીને લખ્યું, માંગતા નવ રહ્યું કાંઇ બાકી.
દેવ સૌ પાળતા સહી વિરંચી તણી, દેવ નો દેવ એ જગત થાપે ;
રદ બન્યા કાગળો એક એવી ગતિ, ફેંસલો નાથ નરસિંહ આપે. ૦૧[…]

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मोरवड़ा मे सांसण की मर्यादा रक्षार्थ गैरां माऊ का जमर व 9 चारणों का बलिदान (ई. स.1921)

प्रसंग: सिरोही राज्य पर महाराव केशरीसिंह का शासन था। राज्य आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। राज्य की माली हालात सुधारने के नाम पर खजाना भरने की जुगत में दरबार ने कई नये कर लगाकर उनकी वसूली करने का दबाव बनाया। जिन लोगों को कर वसूल करने की जिम्मेदारी दी उन्होंने पुरानी मर्यादाओं और कानून कायदों की धज्जियां उड़ाते हुए उल्टी सीधी एवं जोर जबरदस्ती से कर वसूल करना शुरू कर दिया।

इसी कर-वसूली के लिए एक जत्था मोरवड़ा गाँव मे भी आया। मोरवड़ा गाँव महिया चारणों का सांसण मे दिया गाँव था। सांसण गांम हर प्रकार के कर से एवं राजाज्ञा से मुक्त होता है। ये बात जानते हुए भी दरबार के आदमियों ने आकर लोगों को इकठ्ठा किया और टैक्स चुकाने का दबाव बनाया। गाँव के बुजुर्गों ने उन्हे समझाया कि ये तो सांसण गांव है! हर भांति के कर-लगान इत्यादि से मुक्त, आप यहाँ नाहक ही आए! यहाँ सिरोही राज्य के कानून नहीं बल्कि हमारे ही कानून चलते हें और यही विधान है।[…]

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श्री मोरवड़ा जुन्झार जी – कवि रामदान जी

।।श्री जुन्झार जी।।

सिरोही राजा सोखियो, दुश्मण लीधो देख।
जद्ध किधो महियों जबर तन मन दही न टेक।।

अहि भ्रख भूपत आदरयो, कीध भयंकर कोम।
केशर नृप उन्धी करी, सिरोही रे सोम।।[…]

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स्वातंत्र्य राजसूय यज्ञ में बारहठ परिवार की महान आहूति – ओंकार सिंह लखावत

आज हम स्वतंत्र हैं, मौलिक अधिकारों के अधिकारी हैं और चाहे जब चाहे जो बनने और करने का रास्ता खुला है, परंतु यह हमारे कारण नहीं। जरा सोचिये, कुछ रुकिये, बुद्धि पर जोर लगाइये तब पता चलेगा कि यह सब उन स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान की बदौलत है।

अपने और अपनों के लिये तो सब कुछ ऐसे और वैसे करने को तत्पर रहते हैं, क्या कभी इनके बारे में सोचने की फुर्सत भी निकाली है ? यदि हां तो ठीक है, नहीं तो स्वतंत्रता आंदोलन और विप्लव की आंधी के शताब्दी वर्ष में थोड़ा समय निकालिये। दादा-दादी, माता-पिता, पति-पत्नी, बेटी-बेटा, पौता और पौती में आप जो भी हो बैठकर स्वतंत्रता सेनानियों की माला के मणिये बने स्वातंत्र्य वीर श्री केसरी सिंह जी बारहठ, श्री जोरावर सिंह जी बारहठ और श्री प्रताप सिंह जी बारहठ की संक्षिप्त जीवनी पढ़ डालिये।

बारहठ परिवार की स्वतंत्रता के राजसूय यज्ञ में महान् आहूति हमें स्वतंत्रता का महत्व बताती है। जीवन जीने की सार्थकता का भान कराती है।[…]

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‘थळवट बत्तीसी’ बनाम ‘थळवट रौ थाट’ – कविराजा बांकीदास आशिया / डॉ. शक्तिदान कविया

थळवट बत्तीसी (बांकीदास आशिया)
जेथ वसै भूतां जिसा, मानव विना मुआंह।
ढोल ढमंकै नीसरै, पांणी अंध कुआंह।।
थळवट रौ थाट (शक्तिदान कविया)
थळ रा वासी थेट सूं, हरी उपासी होय।
अष्ट पौर तन आपरै, कष्ट गिणै नंह कोय।।[…]

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श्री करुणाकर-कीर्ति – डॉ. शक्तिदान कविया

।।छंद रेंणकी।।
धर अम्बर सधर अधर कर गिरधर, जग सुर नर अहि नाम जपै।
झंगर गिर सिखर सरोवर निरझर, तर तटनी मुनि प्रवर तपै।
सुन्दर घनस्याम विसंभर श्रीकर, भूघर नभचर उदर भरै।
मत कर नर फिकर सुमर मन मधुकर, करुणाकर भव पार करै।
(जिय) करुणाकर निस्तार करै।।1।।[…]

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श्री डूंगरेचियां रौ छंद – मेहाजी वीठू

।।छंद सारसी।।
रम्मवा रंगूं ऊभ अंगूं, वेस चंगूं वेवरं।
चूड़ा भळक्कूं चीर ढक्कूं, पै खळक्कूं नेवरं।
संभाय सारं चूड़ भारं, हेम झारं क्रंमये।
साते समांणी आप भांणी, माड़रांणी रम्मये।।1।।[…]

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Bhagwati Shri Karniji Maharaj – A Biography – Part-3

Chapter VII – Mahaprayan and Some Important Lifetime Miracles Shri Karniji devoted Her long pious life to the cause of righteousness and the establishment of Bharat dharma. Devotees in difficulty received help, warriors received sound advice and blessings and the general public enjoyed a peaceful life. Impressed by Her pious life, Her divine powers, and Her success in strengthening Hinduism and its defenses, numerous devotees, from mighty warriors like the Rathore and Bhati chiefs on the one hand to common householders like Ananda carpenter and Dashrath Meghwal on the other, paid homage to Her. She could have but did not utilize […]

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