गीता रौ राजस्थानी में भावानुवाद-पैलो अध्याय
पैलो अध्याय – अर्जुनविषादयोगः ।।श्लोक।। धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सुव:। मामका: पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय।।१।। ।।चौपाई।। भाळ धरा कुरुखेत धुजाई लड़ण भिड़ण री लोय लगाई। मम सुत अर पाण्डव रा जाया संजय हुय की देख बताया।।१।। (लोय= लड़ण री इच्छा ) (बताया=बताना) ।।भावार्थ।। संजय सूं धृतराष्ट्र कैवै-हे संजय! म्हनै आ बता कै धर्म री धरा कुरुक्षेत्र में म्हारा अर पाण्डव रा बेटा युद्ध करण खातर गया है उण ठौड़ इण बगत कांई होय रह्यौ है थारी दिव्य दीठ सूं देख ‘र बता। ।।श्लोक।। दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा। आचार्यमुपसड़्गम्य राजा वचनमब्रवीत्।।२।। ।।चौपाई।। दळ पाण्डव देखत हुय दोरौ प्रळय मचण रौ लाग्यौ ब्योरौ। […]
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