महाशक्ति देवल महिमा

।।छंद गयामालती।।
माड़वो गामां माड मोटो, अवन सांसण ऊजल़ी।
भलियै तणी थिर देख भगती, निजर हिंगल़ा निरमल़ी।
पह सँढायच कियो पावन, आय जिण घर अवतरी।
दातार देवल दिपै दुणियर, वसू कीरत विसतरी।
माँ वसू सोरम विसतरी।।5
जाल़ियां जूनी रमी जोगण, मगरियां भर मोद म़े।
कर बाप व्हाली रखी कंवरी, गढव निसदिन गोद में।
धर सोढ दादो हुवो धिन-धिन, भाव सूं अंकां भरी।
दातार देवल दिपै दुणियर, वसू कीरत विसतरी।
माँ वसू सोरम विसतरी।।6[…]

» Read more

प्रभू पच्चीसी

।।गुणसबदी।।
पख लीनी पहळाद री पाधर, दैत रो गाळण दंभ।
नरहरि बण नीकळयो नांमी, खांमद फाड़ण नैं खंब।
नमो थारी लीला न्यारी रे, सकै कुण पूग संसारी।।१

प्रेम सूं कीर सुणावतो प्रागळ, गोविन्द री गुणमाळ।
मोचिया पाप गणिका रा माधव, सुणती बैठ संभाळ।
नमो थारी लीला न्यारी रे, सकै कुण पूग संसारी।।२[…]

» Read more

मरणो एकण बार

राजस्थान रै मध्यकालीन वीर मिनखां अर मनस्विनी महिलावां री बातां सुणां तो मन मोद, श्रद्धा अर संवेदनावां सूं सराबोर हुयां बिनां नीं रैय सकै। ऐड़ी ई एक कथा है कोडमदे अर सादै (शार्दूल) भाटी री।

कोडमदे छापर-द्रोणपुर रै राणै माणकराव मोहिल री बेटी ही। ओ द्रोणपुर उवो इज है जिणनै पांडवां-कौरवां रा गुरु द्रोणाचार्य आपरै नाम सूं बसायो। मोहिल चहुवांण राजपूतां री चौबीस शाखावां मांय सूं एक शाखा रो नाम जिका आपरै पूर्वज ‘मोहिल’ रै नाम माथै हाली। इणी शाखा में माणकराव मोहिल हुयो। जिणरै घरै कोडमदे रो जलम हुयो। कोडमदे रूप, लावण्य अर शील रो त्रिवेणी संगम ही। मतलब अनद्य सुंदरी। राजकुमारी ही सो हाथ रै छालै ज्यूं पल़ी अर मोटी हुई।[…]

» Read more

मही मदती मावड़ी

।।छंद-सारसी।।
धिन पिछम राजै भीर धरणी,
हिंगल़ा बड हाथ तूं।
दुख-रोग काटै आय दाता,
बणी राखै बात तूं.
दिल डरपियो सब देश देवी,
छती कर अब छांहड़ी।
सत सुणै हेलो आज सगती, मही मदती मावड़ी।।१[…]

» Read more

मीठी मसकरी

—(53)—

बात उण दिनां री है जिण दिनां आपांरै अठै राज राजावां रो हो। राजावां रै हेठै ठाकर हा।
एक’र चौमासै री वेल़ा ही। खेतां में बूंठाल़ी बाजरियां काल़ी नागणियां ज्यूं वल़ाका खावै ही। बेलड़ियां नाल़ा पसारियां बधती ई जावै ही। चोकड़ियै मोठां सूं खेत मूंगाछम दीसै हा। ऐड़ै में किणी एक ठाकर साहब रै खेत में पड़ोसी गांम रै कुंभार रो गधो हिल़ग्यो।[…]

» Read more

सहजता और संवेदना को अभिव्यंजित करती कहानियां।

राजस्थानी कहानियों की गति और गरिमा से मैं इतना परिचित नहीं हूं जितना कि मुझे होना चाहिए। इसका यह कतई आशय नहीं है कि मैं कहानियों के क्षेत्र में जो लेखक अपनी कलम की उर्जा साहित्यिक क्षेत्र में प्रदर्शित कर अपनी प्रज्ञा और प्रतिभा के बूते विशिष्ट छाप छोड़ रहे, सरस्वती पुत्रों की लेखनी की पैनी धार और असरदार शिल्प शैली से प्रभावित नहीं हुआ हूं अथवा उनके लेखन ने मेरे काळजे को स्पर्श न किया हो। निसंदेह किया है। इनकी कहानियों ने न केवल मेरे मर्म को स्पर्श किया है अपितु इनकी लेखन कला, भाषा की शुद्धता तथा भावाभिव्यक्ति के कारण इन लेखकों की एक अमिट छवि भी मेरे मानस पटल पर अंकित हो गई है।[…]

» Read more

झरड़ो! पाबू सूं करड़ो!!

प्रणवीर पाबूजी राठौड़ अपने प्रण पालन के लिए वदान्य है तो उनके भतीज झरड़ा राठौड़ अपने कुल के वैरशोधन के लिए मसहूर है।
मात्र बारह वर्ष की आयु में जींदराव खीची को मारा। जींदराव की पत्नी पेमां जो स्वयं जींदराव की नीचता से क्रोधित थी और इस इंतजार में थी कि कब उसका भतीजा आए और अपने वंश का वैर ले। संयोग से एकदिन झरड़ा जायल आ ही गया। जब पेमल को किसी ने बताया कि एक बालक तलाई की पाल़ पर बैठा है और उसकी मुखाकृति तुम्हारे भाईयों से मिलती है। पेमल की खुशी की ठिकाना नहीं रहा। वो उसके पास गई। उसकी मुखाकृति देखकर पहचान गई तो साथ ही उसकी दृढ़ता देखकर आश्वस्त भी हो गई कि यह निश्चित रूप से वैरशोधन कर लेगा।[…]

» Read more

प्राक्कथन-इतिहास एवं काव्य का मणिकांचन सुमेल: बीसहथी मां बिरवड़ी

राजस्थान जितना बहुरंगी है उतना ही विविधवर्णी यहां का काव्य है। जब हम यहां के पारम्परिक काव्य का अनुशीलन करते हैं तो शक्ति भक्ति से अनुप्राणित काव्यधारा हमारे सामने आती है। जैसा कि अन्य जगहों पर रामभक्ति काव्यधारा व कृष्णभक्ति काव्यधारा की सरस सलिला प्रवाहित होती हुई हम देखते हैं वहीं राजस्थान में इन दोनों धाराओं के साथ भक्ति की तीसरी धारा उसी बलवती वेग से प्रवाहित है, वो है देवी भक्ति काव्य धारा। क्योंकि राजस्थान में शक्ति पूजन की परम्परा युग-युगीन रही है। जिसका कारण स्पष्ट है कि धर्म व संस्कृति की रक्षार्थ अपने प्राण उत्सर्ग करने वाले शक्ति की प्रतीक दुर्गा के विभिन्न रूपों की उपासना करते रहे हैं। इन्हीं भावों को हृदयंगम कर यहाँ के कवियों ने विभिन्न ग्रंथों का प्रणयन कर अपने स्वाभाविक गुण वैशिष्ट्य का उदात्त परिचय दिया है।[…]

» Read more
1 2 3 4 5 49