कीरत रो धाड़ो कियो !!

“दियां रा देवल़ चढै” री बात भक्त कवि ईशरदासजी सटीक कैयी है। उणां सही ई कैयो है देवणियो अमर है। राजा कर्ण आपरी वीरता सूं बत्तो दातारगी रै कारण जाणियो जावै-

दान के नहर की लहर तो दुरूह देखो,
प्रात की पहर तो ठहरगी रवि जाये की।।

इणी बात री हामी भरतां कविराजा बांकीदासजी कैयो कै आज कठै तो आशो डाभी है अर कठै बाघो कोटड़ियो ? पण उणां रे सुजस री सोरम आज ई अखी है।

कोटड़ियो बाघो कठै, आसो डाभी आज।
गवरीजै जस गीतड़ा, गया भींतड़ा भाज।।[…]

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जूझार मूल सुजस

बीकानेर जिले री कोलायत तहसील रै गांव खेतोलाई रै सालमसिंह भाटी रो बेटो मूल़जी एक वीर क्षत्रिय हो। सं १८६६ री भादवा सुदि १२ रै दिन ओ वीर चोखल़ै री गायां री रक्षार्थ जूझतो थको राठ मुसलमानां रै हाथां वीरगति नै प्राप्त होयो। किवंदती है कै सिर कटियां पछै ओ वीर कबंध जुद्ध लड़ियो। आथूणै राजस्थान रे बीकानेर, जैसलमेर नागौर अर जोधपुर मे इण वीर री पूजा एक लोक देव रे रूप मे होवै।मूल़जी जूझार रे नाम सूं ओ अजरेल आपरी जबरैल वीरता रे पाण अमरता नै वरण करग्यो।जैड़ो कै ओ दूहो चावो है :- मात पिता सुत मेहल़ी बांधव वीसारेह सूरां […]

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दातार बांकजी रतनू सांढां

चेलार (वर्तमान पाकिस्तान) रो एक बांमण ओ प्रण लेर निकल़ियो कै जिको दातार वचन देवैला उणी सूं वो दान ग्रहण करेला। इणी द्रिढ संकल्प रै साथै निकल़ियो वो घणै दातारां कनै गयो पण उणनै वचन देवणियो दातार नी मिलियो। वो मेवाड़, मारवाड़, आमेर, जांगल़ आद स्थानां मे घूमतो घूमतो माड रै केई दातारां कनै फिरियो पण कोई उणनै वचन देवण री हिमत नी कर सकियो। छेवट निरास होय पाछो आपरै गांव जावतो साढां (जैसलमेर) रै रतनू बांकजी रै घरै रुकियो। दिनुगै रवाना होवती वेल़ा बांकजी उणनै दक्षिणा देवणी चाई तो उण आपरे प्रण रे बाबत पूरी बात बतावतै दक्षिणा लेवण सूं नटग्यो। […]

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देशा दशा रो गीत

गीत सोहणो
किण किण मे दोस काढसो कवियां
राज कुवै मे भांग रल़ी
साच कूड़ समभाव आदरै
गुण ओगण री बात गल़ी १
संत्री मंत्री एक सारखा
संविधान नै रैट सही
धज कानून उडावण धरती
वाव आपणै देश बही २ […]

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लोकतंत्र रो ओई लेखो

लोकतंत्र रो ओई लेखो
दीख रही स़ो मत ना देखो
छाती जा दूजां री छेको
समझ आपरी रोटी सेको १
कंवल़ी कंवली बातां कैजै
राम भरोसै मतना रैजै
वाट सुंवोड़ी अब मत बैजै
संकट बंकट हंसतो सैजै २ […]

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ईश आराधना

नखड़ै हिरणाख विडारण नागर सागर मे तजी सैज सजी
पहिल़ाद उबारण कारण पाधर भाल़ सुं आविय नाथ भजी
उण वेल़ धरा अर धूजिय अंबर थंब फटै नरसिंघ थयो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो १ […]

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नाग अर मिनख

भूंड रो ठीकरो
क्यूं फोड़ै है मिनख नाग रै माथै
नाग इतरो नुगरो नीं होवै!
जितरो अेै ,बोलण वाळा,बता रैया है
आपरै सुगरापणै रो डूरो बैचण सारू
थांनै तो ठाह है शायद
कै
नाग री राख सकां हां निगै
बच सका हां […]

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भूंड

अड़ो धड़ो
घड़ो भूंड रो बहू रै सिर पड़ो
आ बात कूड़ी नी है
जद जद ही फूटो है
भूंड रो ठीकरो अबल़ावां रै माथै ई छूटो है
तूटो है अबखायां रो भाखर
दल़िज्या है मूंग छाती माथै
उडिया है चरित्र रा चींथड़ा
तो इणा मे ई निकल़ी है […]

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लिख आज कवि कोई इसड़ो गीत

मत रोक कलम नै बैवण दे
तूं लुका छिपी नै रैवण दे
छंट ज्यावै बादल़ नफरत रा
अंतस नै साची कैवण दे
बह ज्यावै दरद कल़जै रो
अर होवै प्रीत री जीत
लिख आज कवि इसड़ो गीत १

फैल रयो मन घोर अंधारो
सूझै नहीं सबल़ कोई सा’रो […]

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देश दशा

गुणसबदी
लाज बिहूणा बणिया, शासन रा सिरताज।
रीत आं तो इण देश री रेटी, खुद री मेटी खाज।।
दशा इण देश री देखो रे, लेवूं इण बात रो लेखो।।१
झूलिया फासी देखलो जोधा, वां री भूलिया बात।
सिटल़ां नै इम देयद्यो शासन, पोल मांही परभात।।२
बल़ गैडी रै बैठिया गादी, इण आजादी ओट।
जन हितां पर आंखियां जोवो, चवड़ै मारै चोट।।३[…]

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