जीवट ही जीवण है

जीवट ही जीवण रो नाम अरे, जग देख तमासो हारी ना
जूझ्या ही कीमत जीवण री, लड़तोड़ो हीमत हारी ना

चींचड़ बण चूंटै काया नै, माया रा लोभी मतवाल़ा
पग पग रे छेड़ै परड़ां है, घट घट मे काल़ा फणवाल़ा
पावै जिण प्यालां दूध बता, विसड़ै री जागा की मिलसी
हेवा कर चुल़सी पाछो तूं, झाटां अर डंकड़ा घण मिलसी […]

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हिंगोल़राय री स्तुति

पिछमाण धराल़िय तैं प्रतपाल़िय थांन तिहाल़िय जेथ थपै
सत्रु घट गाल़िय संत सँभाल़िय देव दयाल़िय रूप दिपै
पुनि पात उजाल़िय तैं पखपाल़िय लंब हथाल़िय कूण लखै
कर काज सदा हिंगल़ाज कृपाल़िय राज तुंही मम लाज रखै १ […]

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कवित्त करणीजी रा

वय पाय थाकी हाकी न केहर सकै शीघ्र
कान न ते सुने नहीं किसको पुकारूं मैं
चखन तें सुझै नहीं संतन उदासी मुख
कौन ढिग जाय अब अश्रुन ढिगारुं मैं
तेरे बिन मेरो कौन अब तो बताओ मात
दृष्टि मे न आत दूजो हिय धीर धारूं मै
कहै गीध चरणन मे छांह मिले थिर
शरण जननी की फिर मन को न मारूं मै १ […]

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कांई ठा कांई होवेला

कांई ठा कांई होवेला

म्है थारै मूंडै री मीठी मुल़क
आंख्यां मे झरती अपणास
विश्वास रै बोलां पर
चमगूंगो सो, चितबगनो सो
उतरतो रैयो अजाणी
ढल़तोड़ी ढाल़ां पर
चढतो रैयौ ऊंचोड़ी पाल़ां पर
घालतो रैयो हींड लंफणां मे […]

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गौ भक्त मा पेमां

बीकानेर रै आथूणै कड़खै रो छे’लो गांव है दासोड़ी। इण गांव रै आथूणै अर उतरादै पासै जोधपुर रो अंतिम गांव है मिठड़ियो। मिठड़ियै री लागती कांकड़ माथै आयोड़ा दासोड़ी रा खेत करनेत बाजै। लगै टगै वि.सं. १८०० रे आसै पासै दासोड़ी मे पेमां माजी होया। दासोड़ी उणां रो ससुराल हो। पीहर किण जागा हो ओ तो ठाह नी है पण बै जात रा बीठवण (बीठू) हा। आ बात म्हारा जीसा (दादोसा) गणेशदानजी रतनू कैया करता हा। पेमा माजी रे गायां घणी होती सो बै आपरै खेत करनेत ढाणी विराजता। उण दिनां मिठड़ियै रो ठाकुर कल्लो पातावत हो। ठाकुर री कुदीठ माजी […]

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तूं किणी गढ नै टिल्लो दीजै!!

माड़वो(पोकरण)आपरी सांस्कृतिक विरासत रै पाण चावो गांम रैयो है। इणी गांम में महाशक्ति देवल रो जनम होयो। इणी धरा नै बूट बलाल बैचरा जैड़ी महाशक्तियां रो नानाणो होवण रो गौरव प्राप्त है। इणी धरा री मा चंदू माड़वा गांव री रक्षार्थ अखेसर री पावन पाल़ माथै पोकरण ठाकुर सालमसिंह रे खिलाफ १८७९ वि° मे जमर कियो। चंदू मा सूं पैला इणां री मा अणंदूबाई, गुड्डी रै पोकरणां रै खिलाफ जमर कियो। जद इण गांम री ऐ गर्विली गाथावां सुणां तो लागै कै शायद इण माटी में ईज ऐड़ो आपाण भर्योड़ो हो कै अठै रो वासी आपरै माण नै मुचण नीं […]

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