सुण कलम सांच बोल्यां सरसी

ओ बगत बायरो बतळावै
उणसूं अणजाण कियां बणसी।
जे भाण ऊगणो भूल्यो तो
सुण कलम साच बोल्यां सरसी।।
जण-जण रै मन में भय जब्बर
रण-रण त्रासां रणकार हुवै।
भण-भण अै लोग भला भटकै
खण-खण खोटी खणकार हुवै।।
देवां रै झालर झणकारां
रैयत रुणकारां दबी पड़ी।
फांफी फणगारा फळफूलै
ईमान धरम पर मार पड़ी।।
कण-कण धरती रो कांपै है
आभो किम धीरज अब धरसी।
मरजाद धरम नै राखण हित
सुण कलम साच बोल्यां सरसी।।01।।[…]

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बूढा घर री साख हुवै

बूढां रो अपमान कर्यां सूं, मिनख जमारो खाख हुवै।
बूढा थारी-म्हारी सोभा, (अै) बूढा घर री साख हुवै।।

इक दिन सबनै बूढो होणो, इणमें मीन न मेख सुणोे।
चार दिन रो जोश जवानी, पछो बुढापो पेख गुणोे।।
शैशव, बाळपणो’र जवानी, अगलो आश्रम दे ज्यावै।
ओ बुढापो कछु नहीं देवै, जीव तकातक ले ज्यावै।
मिटसी महल, ठहरसी गाडी, आं रिपियां री राख हुवै।
बूढा थारी-म्हारी सोभा, (अै) बूढा घर री साख हुवै।। 01।।[…]

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स्वार्थ रूपी होलिका की गोद में जीवनमूल्य रूपी प्रहलाद का भविष्य

रंग, उमंग और हुड़दंग के रंगारंग पर्व होली की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं। हमारे पूर्वजों ने जीवन के हर कदम पर कुछ प्रतीकात्मक उदाहरण प्रस्तुत करते हुए हमें जीवन जीने की सीख प्रदान की है। होली से जुड़े कुछ प्रतिमानों पर आज विचार करने की जरूरत आन पड़ी है। “जमाना बदलता है तो सब कुछ नहीं तो भी बहुत कुछ बदल जाता है” यह उक्ति हर देश, काल एवं परिस्थिति पर सही-सही चरितार्थ होती रही है लेकिन हाल ही में देश-दुनिया में घटित अनेक घटनाएं संवेदनशील लोगों के लिए अत्यन्त पीड़ादायक हो गई है। जानबूझ कर जिंदा मख्खी निगलना आम […]

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खुद रै बदळ्यां बिना बावळा

खुद रै बदळ्यां बिना बावळा,
राज बदळियां के होसी ।
कंठां सुर किलकार कर्यां बिन,
साज बदळियां के होसी।।

कितरा राज बदळता देख्या,
सीता रै पण कद सौराई।
जनक आपरै वचन जिद्द में,
परणावण री सरत पौलाई।। […]

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न्यारै-न्यारै

न्यारै-न्यारै मिनख मनां में,
देखो न्यारी-न्यारी आग।
कठै राग अनुराग विहूणी,
कठै विराग मांयनै राग।।

बागवान ही बण्या विधूंसक,
सुरड़ै-सुरड़ विधूंसै बाग।
टणका झुरै टोपल्यां खातर।
पतहीणां सिर पचरंग पाग।। […]

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अम्बा-अष्टक

लाखअसी चव जोनिय मांझल जानिय मानव श्रेष्ठ जमारो।
धीर विवेक तुला पर तोल अमोल सतोल सुबोल उचारो।
तारन या भवसागर सों गजराज न दीखत और सहारो।
बार हि बार उचार अलौकिक अम्ब सुनाम उबारन वारो।। 01।।

धार तुं धार मनां निरधार सदा इक सार सुकारथ सारो।
लाख जतन्न अखन्न रहे नँह जीवन जोबन धन्न उधारो। […]

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मंत्री नै कुण मूंडियो

संसद रै इक सदन री,बात कहूं बतळाय।
मंत्री मूंड मुंडायनैं,आसण बैठो आय।।
सगळा पूछै सैन में, बोले नांय विशेष।
बीती कद आ बारता, कटिया कीकर केस।।
संवेदनवश सागलां, स्वर में धीर समाय।
पूछ्यो पूसारामजी, दूणों दुख्ख दिखाय।। […]

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करै कुण कोड बेटी रा

करै कुण कोड बेटी रा, खड़्या खम ठौर मारण नैं।।
जगत में आण सूं पै‘ली, जकी रा लाख दुश्मण है।।

हुई जद आस आवण री, नयो मेहमान निज घर में।
बधायां बांटती दादी, फिरी हर एक घर-घर में।।
मिली जद जाँच में बेटी, लगी क्यों लाय लागण नै।
करै कुण कोड बेटी रा, खड़या खम ठौर मारण नै।।1।।[…]

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मत कर

दास मत बण दौर रो,तूं-
और री कीं आस मतकर।
गौर कर इतिहास गहला,
ठौर री ठकरास मत कर।।

मायतां रै माण मांही,
हाण देखै सौ हरामी।
काण कुळ री हाथ वांरै,
देण री दरखास मत कर।। […]

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