आवडजी महाराज रा नाराच छंद – मानदानजी कविया दीपपुरा, सीकर

Aavad Ma

॥दोहा॥
साल अठ्यासी में सुणी, आठौ संवत अनूप।
आवड जग मैं अवतरी, श्री हिंगळाज स्वरुप॥1॥

॥छंद नाराच॥
बिमाण बैठ सात भाण आसमांण उत्तरी।
धिनो अछी छछी ज होल गैल लूंग लंगरी।
सुधाम धाम मांमडा जु धीव तूं कहावडा।
नमो ज मात बीस हाथ पात पाळ आवडा॥1॥

कलू असाधि की उपाधि व्याधि भोम पै छई।
सरूप हिंगळाज रो अनूप आवडा भई।
अखंड मंड तेमडै प्रचंड छत्र छाबडा।
नमो ज मात बीस हाथ पात पाळ आवडा॥2॥

लधु ज भ्रात घालि घात रात पीवणों अही।
उगांण प्रात भांण आंण ताण लोवडी दई।
पियूष ल्याय स्वर्ग जाय पाय के जिवावडा।
नमो ज मात बीस हाथ पात पाळ आवडा॥3॥

मदंध देश सिन्ध में समंद नाम हाकडो।
हिलोळ लेत पोळ की सलील छोड छाकडो।
समेट थेट थाह लेय पेट में मुवावडा।
नमो ज मात बीस हाथ पात पाळ आवडा॥4॥

सुदेश देश जेसमेर नेस तेमडै तपै।
उधोत होत अंग औप जोत भांण री छिपै।
सदैव भक्त देत मुक्त जुक्त काज सावडा।
नमो ज मात बीस हाथ पात पाळ आवडा॥5॥

हुलास में विलास रास आस पास में मंडै।
तठै ज तीन लोक री प्रवीण डोकरी तँडै।
रचै अखाड धाड धाड सिन्धु हाड पावडा।
नमो ज मात बीस हाथ पात पाळ आवडा॥6॥

धरा ध्रुजाक होय हाक देय डाक डैरवा।
कसीस आत साथ मैं बतीस बीस भैरवा।
सकत्ति संग में उमंग रंक कूं रचावडा।
नमो ज मात बीस हाथ पात पाळ आवडा॥7॥

मदां ज पूर व्है जरूर धू सिन्दूर धारणी।
संगीत गीत चित्त प्रीत रीत सूं उचारणी।
महिख्य छाग तोडि खाग रत्र तुं चढावडा।
नमो ज मात बीस हाथ पात पाळ आवडा॥8॥

त्रंबाळ मेघमाळ ज्यो बडाळ सद्द बाजणां।
बिहद्द रद्द होत पद्द नद्द घूघरां घणा।
धु धज्ज कट्ट व्है ध्रकट्ट थ्रंग नत्त थावडा।
नमो ज मात बीस हाथ पात पाळ आवडा॥9॥

मधू असोज मास मौज चित्त चौज चोगणी।
निसंक दीह अंक में जगात रात जोगणी।
छपन्न सात नौ करोडि साथ में रमावडा।
नमो ज मात बीस हाथ पात पाळ आवडा॥10॥

करो सहाय मुझ्झ माय आय बेर बंकरी।
कुरंद मेट दे चपेट सुक्ख भेट शंकरी।
दया दराज सार काज लाज की निभावडा।
नमो ज मात बीस हाथ पात पाळ आवडा॥11॥

कलू कलिष्ट भोत भ्रष्ट कर्म नष्ट सै भया।
जरूर सत्त धर्म का अंकुर भूमि ना रहा।
सु द्रष्टि भाळ दुःख टाळ पाळ तुझ्झ डावडा।
नमो ज मात बीस हाथ पात पाळ आवडा॥12॥

~~मानदानजी कविया दीपपुरा, सीकर

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