अवतरण अर प्रवाड़ां रो गीत

किण तरियां भगवती पैल पैल जैसाण में दूजां बीकांण में अर तीजी बार जोधाण रा राज अर देश में अवतार लेय भगतां रो भलो करियो अर दुष्टां रो दमन करियो इण भाव रो गीत महाराज श्रीइंन्द्रबाईसा रो हिंगऴाजदानजीकविया रचित

।।गीत।।
प्रथम देश जैसाण बीकाण प्रगटी पछैं,
बरजियो भांण बेड़ो उबारियो।
अबै परब्रह्म वाऴी प्रकृति अद्रजा,
धजाऴी मद्र अवतार धारियो।।1।।

बंस रतनूं धनो छात बीसोतरां,
धनो धिन मातरी मात धापू।
बाप सागर धनो सकति मा बापरो,
बाप-मह धिनो शिवदान बापू।।2।।

संमत सर छत्तीस कम बै सहस,
मास आसाढ तिथि सुकल नोमी।
बार सुक्र नखत स्वांति संध्या बखत,
भवानी ओतर्या श्रीखुड़द भोमी।।3।।

भऴहऴै नूर तप तेज बप भामणां,
बांमणां घड़ी पल बिगत बेवी।
जामणां जोय गोचर गिरह जाणियां,
दिया रऴियामणां दरस देवी।।4।।

नेस संतोसणां भूपत्यां निवाजै,
खोसणां ऊपरै रहै खीजी।
राठवड़ थाट दूदाहरां राजमें,
बिराजै आज हिंगऴाज बीजी।।5।।

मरद पवसाख भूषण कड़ा मूंदड़ी,
कंठ डोरो मुरति लवंग कानां,
तेमड़ा समोभ्रण खुड़द गेढा तणों,
थांन जाहर थयो राज थानां।।6।।

बाघऴो बिकट सादूऴ बाहण बणैं,
डांखियो सीस समतूऴ डालै।
अरोहै मूऴ दुष्टां तणा उखाड़ण,
झाड़क्या रूखाऴण शूऴ झालै।।7।।

किन्नर असमाण कुसमांण बरखा करै।
गंधरब गांण बाखाण गावै।
कहीजै नाग नरइन्द्र गिणती कवण,
इन्द्र इन्द्रभवण नूं नमण आवै।।8।।

झलै सिर छत्र चमरां हुवै झापटा,
हमेसां दोपहर सांझ होतां।
बंबरी धोक कवि लोग बोलै बिरद,
जगै जगदम्बरी दोय जोतां।।9।।

धूपिया धकै चिटकां घिरत धकधकै,
बारूणी डकडकै तरफ बामी।
बकबकै बीर जोगण छकै दो बखत,
भकभकै हुतासण हेत भामी।।10।।

रास रामत रमै सभै नव रातरी,
नमो कहि जातरी सीस नामै।
मातरी घणी बातां करा मातरी,
पातरी जीभ किम पार पामै।।11।।

पांगऴा खड़ै जमदूत फीटा पड़ै,
जोखमी उघड़ै नयण जूटी।
दिया बरदान मन्तर महादेवरा,
बभूती धनन्तर तणी बूंटी।।12।।

मोतरो लेख बिसना तणों मेटियो,
पोतरों सैनरो चसम पाई।
सुपह चहुवांणरी कंवर आई सरण,
बकस दीधा चयण इन्द्र बाई।।13।।

बाररी बात बालाबक्स बी ऐ रै,
हिऐ मांहि तकलीफ हूगी।
जरां हूं याद पोहकरी जिमकरी जद,
पयादा हरी ज्यों इन्द्र पूगी।।14।।

नासती समै चौफेर आतां नजर,
मया कर आसती फेर मंडी।
पलां धरतां चरण फेर पाधारिया,

चारणां बरण आधार चंडी।।15।।
तथा श्रीचंद फरजंद परतू तणों,
पाय संकट घणों खुड़द पूगो,
कसट सहियो जिको हाल मालुम कियो,
हाल कहियो अतै ई भ्हाल हुगो।।16।।

श्रीचंदजी परतूजी रा बेटा श्रावगी जैनी बांणिया सीकर ठिकाणें में दीवाणगिरी रो काम करता हा अर आपरी बीमारी भगवती ने बताई इती देर मे ही ठीक हुयगा अर आपरी लारली बचियोड़ी उमर में श्रीमढ खुड़द अर भगवती री सेवा में ही बिताई अर बिशेष कर भवन निर्माण मे घणोंक सहयोग अर देखरेख राखी।।

~~ हिंगऴाजदानजी कविया सेवापुरा
संकलन: राजेंन्द्रसिंह कविया (संतोषपुरा-सीकर)

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