बाळ जाण माँ बगसजे

( मेहाई सतसई – अनुक्रमणिका )

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काढो शुभ कादंबरी, करणी मां रे काज।
आरोगेला ईसरी, मेहाई महराज।।६२२
सरल मनां सुणजे सगत, गरल घणो मन म्हां ज।
बाळ जाण बगसो भवा, मेहाई महराज।।६२३
सदा ह्रदय सरसावजे, स्नेह सुधा सरिता ज।
अवगाहण मिस आवडा, मेहाई महराज।।६२४
किनियांणी कोटिक गुनां, रोज करूं रिधु राज।
बाळ जांण मां बगसजै, मेहाई महराज।।६२५
आवाहण नँह आवडे, कविता कीरत मांझ।
क्षमा करो क्षेमंकरी, मेहाई महराज।।६२६
ढंग पाठ पूजा तणा, रहै याद नँह राज।
बगसो बाळक मावडी, मेहाई महराज।।६२७
वंदन विसरजन नहीं, म्हनैं आवडै मां ज।
करो खमा किनियांण मां, मेहाई महराज।।६२८
मंतर तंतर मेल दे, याद किया बस राज।
सहज सरल स्वीकारजो, मेहाई महराज।।६२९
क्रोड किया करणी गुनां, कटै कहत बस मां ज।
कलिमल पातक काटणी, मेहाई महराज।।६३०
जेडो तेडो जोगणी, म्है मावड सिसु राज।
राजी हुय जिम राखियो, मेहाई महराज।।६३१
भूल चूक या भ्रांति वस, जो व्है गुना कियाज।
तौ थें मन धरजो मती, मेहाई महराज।।६३२
~~नरपत आसिया “वैतालिक”

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