खूबड़ी री ख्यात

khoobadMataमा कूबड़ी,खूबड़ी खूबड़ जिकी वांकल नाम सूं ई राजस्थान अर गुजरात में जाणीजै। विक्रम री आठवीं सदी रै उतरार्द्ध में साऊवा शाखा रै चारण माधाजी रै घरै इणरो रो जनम होयो। मूल़ नाम कांई हो? ओ तो ठाह नीं है पण शरीर में वांक होवण रै कारण कूबड़ी अथवा खूबड़ी/खूबड़ वांकल नाम सूं प्रसिद्ध होई। भीनमाल रै कनै खांडै नामक स्थान माथै मुख्य थान तो दूजो मुख्य थान सरवड़ी नामक स्थान। किंवदंती है कै एकर मुलक में भयंकर अकाल़ पड़ियो। मऊ माल़वै जावती खांडै देवल रै पाखती एक वड़लै नीचै रातरो वासो लियो। भूख सूं डरता रात रा ई बाल़कां नैं सूतां नैं छोड नाठग्या। दिनूंगै बिनां मा बाप रा बालक रोवण लागा। दयाल़ु खूबड़ सुणिया तो आई अर सब टाबरां नैं आपरी झूंपड़ी में लेयगी अर पाल़िया। आद बातां चावी है। सरवड़ी रै बोगसां री आराध्य देवी देवी खूबड़ री आज कविवर रासाजी बोगसा री रचना –

प्रथमाद ऊपर काल़ पड़ियो, हवै मऊ दल़ हालिया।
वड़ तल़ै लीनो रात वासो, छोड बालक चालिया।
प्रतपाल़ कीनी बाल़कां पह, दूध रोटी दड़दड़ी।
सेवगां तारण आद सगती, खल़ां मारण खूब़ड़ी।।

पढी। चूंकि मैं “सगती सुजस माल़ा” लिख रैयो हूं। जची कै इणी छ़ंद में डोकरी वांकल री वंदना लिखूं। एक रचना लिखी हूं। आप विज्ञ पाठकां री राय खातर प्रेषित कर रैयो हूं-

।।सोरठा।।
वीसहथी विसवास, परघल़ तो प्रथमाद पर।
आई सबरी आस, मह पूरै माधासधू।।1
बाई वसुधा वास, महि कीधो माधासधू।
रीझ रमै नित रास, खांडै देवल़ खूबड़ी।।2
पूजै तो प्रथमाद, वांकल रूपै वीसहथ।
सुण नित आरत साद, मदत सजै माधासधू।।3
सांमणसर री पाल़, झंगर जाडी जाल़ियां।
वीहहथी विरदाल़, खेजड़ बैठी खूबड़ी।।4
खांडै देवल़ खास, सगत विराजै सरवड़ी।
इल़ पर बे ऐवास, खरा थापिया खूबड़ी।।5

।।छंद गयामालती।।
मात धिन घर जनम माधै, हरस तन हिंगल़ाज रो।
इल़ साख सऊवां करण ऊजल़ रूप कूबड़ राजरो।
हेतवां हांण विघनांण हारण तांण होफर ताकड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।6

बोगसा पड़ चरण वंदै सरस मन लग सेवरो।
थिर थांन निजपण नेस थपियो दरस निसदिन देवरो।
तुंही दुरस आखर दैण देवी वरद विद्या बावड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।7

सांमण सरवर नीर निरमल़ जठै जूनी जाल़ियां।
हरियाल़ चहुंदिस निजर हेरी प्रीत परघल़ पाल़ियां।
महमाय खूबड़ मुदित मनसूं खमा बैठी खेजड़ी
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।8

श्रीमाल़ रै नजदीक सगती, थांन खांडो थापियो।
नित भाल़ रखणी खास निजजण कसट जिणरो कापियो।
आपियो ओटो सदा अणभै मेट तोटो मावड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।9

थाप खांडै थान थिरचक जोर दीपै जामणी।
रांमत अवनी रीझ रचणी रास नवलख रांमणी।
कुण लखै अंबा तूझ क्रांमत प्रिथी परचा परवड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।10

धैकाल़ पड़ियो आय धरती नाज सब घर नीठियो।
सज माल़वै प्रस्थान सबजण काल़ काटण वां कियो।
वड़ ओट ढबिया लैण वासो वसु प्रसिद्ध बातड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।11

वड़ तल़ै मऊ सब छोड बाल़क भाग छूटा भूखिया।
परगाल़ जामण पिता बिन पह करूण बाल़क कूकिया।
उण वेर आरत सुणी आतुर जद मँडी नैणां झड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।12

बुचकार हिवड़ै चेपिया बढ दयाकर नैं डोकरी।
इणभांत पूगी उठै आयल परम हेलै पोकरी।
दही दूध री दपटांण देवी झोख मांणी झूंपड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।13

जिगनाण महाजन कियो जगड़ू तंबू सुंदर तांणिया।
चित चाव नूंतो दियो चहुंवल़ उमंग सबजन आंणिया।
मद मांय महाजन कुबद्ध मिल़ियो खरो भूलो खूबड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।14

सुवास मीठै तणी संचरी विलख बाल़क बोलिया।
जीमाण जीमण मधुर जामण सदल़ साथै सो लिया।
मन भ्रांत कूबड़ करी महाजन चठठ झाल़ां चख चड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।15

भयंकार अंधड़ अयो भोमी छिती अवनी छायगी।
विधूंसनै जिग वीसहाथां अंब पूठी आयगी।
जद कल़ा लखियो सेठ जगड़ू गयो सरणै गड़गड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।16

झट सेवा कारण साह जगड़ू एक बेटो आपियो।
अपणाय निजकुल़ रीझ उणनै थाट देनै थापियो।
भल रही मोहरै निजर शुभभर घरै आणँद हर घड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।17

कर दया छौल़ां धरै करुणा अक्खर शुद्ध तैं आपिया।
दासोड़ी गिरधरदान देवी छंद चित धर छापिया।
कर जोड़ जपसी ऐज कीरत खरी मदती खूबड़ी।
जय मात खूबड़ जगत जाहर सगत वाहर सरवड़ी।।18

छप्पय
माधासधु महमाय, जोगणी जूनी जांणो।
गुण जिणरा नित गाय वडम कर छंद बखांणो।
अरजी सुणै अजेज साचपण गरजी सारै।
धारै नित धणियाप सहजपण काज सुधारै।
सताबी मदत भगतां सजै अग चढ नाहर ऊरड़ी।
गीधियै तणा अवगुण गहन खमा करै तूं खूबड़ी।।19

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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