बाई पाती बांचजै

( मेहाई सतसई – अनुक्रमणिका )

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जो नँह करणी जनमता, मेहा रे घर मांझ।
उण नें करतो याद कुण, मेहाई महराज।।२३०
बेटी करणी मात बण, जाया कुळ किनिया ज।
अमर पिता जुग जुग कियो, मेहाई महराज।।२३१
भळळळ कुंडळ भळकता, झळळ हार गळ मांझ।
अनुपम आभा आप री, मेहाई महराज।।२३२
लोवड लाल लखावणी, डमरु हाथ लियां ज।
कर कंकण कंचन धर्या, मेहाई महराज।।२३३
छम छम पग में बीछिया, झांझर वळ पग मांझ।
कविता री सरिता कथी, मेहाई महराज।।२३४
कर मैं इक किरमाळ ले, दूजै तरशूळां ज।
हुंकारै खळ दळ हणण, मेहाई महराज।।२३५
कस्यौ हीरामण कंचुऔ, अजब बणी छबि आज।
आप सरीखा आप हो, मेहाई महराज।।२३६
सचर अचर री स्वामिनी, करण भगत रा काज।
भलां ओढियो भेळियो, मेहाई महराज।।२३७
ढोल वाजडा बाजिया, बाजी रणतूरां ज।
नवलख साथै नीसरी, मेहाई महराज।।२३८
चौरासी सह चारणी, नवलख दळ बळ साज।
डारै दहितां डोकरी, मेहाई महराज।।२३९
चिरजा गावै चारणां, अर घण कंठ अवाज।
जागौ जांगळ जोगणी, मेहाई महराज।।२४०
सडड सडड सह खेचरी, घणण घणण घन गाज।
अडड अडड मां आवती, मेहाई महराज।।२४१
वदतां करनल नाम वड, भय जावै सब भांज।
धरुं ध्यान जांगळ धणी, मेहाई महराज।।२४२
वडो थंभ वसुधा तणी, मौ सिर हथ रख मां ज।
एक भरोसै आप रे, मेहाई महराज।।२४३
घणा भाव मन गगन मँह, उमडत घुमडत राज।
बै बूठा दोहा बणै, मेहाई महराज।।२४४
किण मन सर मँह कंकरी, अजब फैक दी आज।
लहर लहर कविता लसी, मेहाई महराज।।२४५
देखी कदी न डोकरी, अर नँह सुणी अवाज।
मन निज सूं पण मैं मढी, मेहाई महराज।।२४६
बाई पाती बांचजै, मन री चीट्ठी मां ज।
जामण जनमां री जणी, मेहाई महराज।।२४७

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