बीसहथ रा सोरठा

beeshath

आगल़ किण आईह, मन चिंता राखूं मुदै।
म्हारी महमाईह, बणजै मदती बीसहथ।।1
कुलल़ो अनै करूर, समै बहै संसार में।
जोगण आव जरूर, बण मदती तूं बीसहथ।।2
करनी तूं करसीह, मोड़ो इणविध मावड़ी।
सुकव्यां किम सरसीह, बिगड़्या कारज बीसहथ।।3
दीठो नह दूजोह, जिणनैं हूं जायर जचू।
किनियांणी किजोह, वाहर म्हारी बीसहथ।।4
मात निजर मोल़ीह, दीसै नीं दुख दूथियां।
भगवत्ती भोल़ीह, कै बोल़ी हुयगी बीसहथ।।5
थल़वट पत्त थांनैह, की सांगण नितरो कहूं।
मत भूलै म्हांनैह, बिखमी विरियां बीसहथ।।6
डोकर ढीली डोर, किम छांडी म्हांरी कहो।
जोगण म्हांरो जोर, वैणां सिमट्यो बीसहथ।।7
साद नहीं सुणसीह, तणसी नह मदती तुरत।
बिगड़्यो कज बणसीह, बोल बता किम बीसहथ।।8
ओगण तण आगार, म्हे तो सांप्रत मावड़ी।
भुज थारै ई भार, विघन हरण रो बीसहथ।।9
आगै अणहदवार, साय करी तैं सेवगां।
कल़जुग आडी कार, बणजै अब लो बीसहथ।।10
फूट झूठरु फरेव, चहुंवल़ पसर्या चौवटै।
भलां भलां रो भेव, बता पड़ै नीं बीसहथ।।11
विष री फैली वेल, तंतू नेह रा तूटिया।
फगडाल़ां रा फेल, वसुधा दीसै बीसहथ।।12
रही न आदू रीत, प्रीत करण परिवार सूं।
नरां खरां री नीत, बिगड़ी लागै बीसहथ।।13
मिटी देख मरजाद, आदररु अपणास री।
वसुधा सकल़ विवाद, बिन कारण ई बीसहथ।।14
मची माररु काट, हाट बंध व्ही हेतरी।
मन किम झेलै माठ, बगत ऐड़ी में बीसहथ।।15
छोरां ऊपर छेह, तूं करसी इणविध तरां।
ममता वाल़ो मेह, बिन कुण करसी बीसहथ।।16
तद जद तूठणरीह आदत संभली आदसूं।
रै थारै रूठणरीह, बांण पड़ी कद बीसहथ।।17
आगै हेलो आध, तूं सुणती हद ताकड़ी।
अम कोटी अपराध, वल़ माफी दे बीसहथ।।18
सिंघ चढणी सारोह, कारज म्हारो करनला।
थल़ धरणी थारोह, वल़़ै भरोसो बीसहथ।।19
आतुर तूं आगैह, भीड़ भांगती भगतरी।
लोहड़धर लागैह (अब)बूढी हुयगी बीसहथ।20
वरधर दैण विसास, आसा पूर अराधवां।
दाखै गिरधरदास, विणती तोनैं बीसहथ।।21
पील़ोड़ी परभात, मिल़ै सैण मनभावणा।
दुसटां रो दिसटांत, बाल़ै अल़गो बीसहथ।।22
सदा समेल़ो सैण, परघल़ व्है परभात रो।
विमुंहां बोलै वैण(वांनै)बाल़ै अल़गा बीसहथ।।23
निसदिन रहां नचींत, सीत नही उर संचरै।
जगतँब राखै जीत, विघन विणासै बीसहथ।।24
गिरधर तो गंगाह, गिणै तनै गोदावरी।
रैवै इकरंगाह, बीसूं बातां बीसहथ।।25
मेटै पातक मात, दुरबुध दूरै दाटणी।
हितवां ऊपर हाथ, बणिया राखै बीसहथ।।26
बणवै नवल विसास, नित नित थारै नेह रो।
देख जदै ई दास, बैठो निचींतो बीसहथ।।27
जोगण तूं जूनीह, नवल पवाड़ा रचण नित।
खल़ कितरा खूनीह, विणस्या हाथां बीसहथ।।28
जोगण तूं जाणैह, मन म्हारै री मावड़ी।
तावल़ियो ताणैह, वाटां होफर बीसहथ।।29
सांप्रत तैं सल़ियाह, कितरा कज अड़िया किया।
वरदायक विल़ियाह, वल़ दिन सारा बीसहथ।।30
बह आयो बीकोह जोरावर सुत जोधरो।
तिणनै तैं टीकोह, वर्व्यो नीको बीसहथ।।31
पूगल़ रो पत पेस, सेखो हुवो सुवाप में।
रिपुवां देवण रेस, वर वो मांगण बीसहथ।।32
जादम अरियण जेर, तूं करसी तरवारियां।
फतह पावसी फेर, वर ओ दीनो बीसहथ।।33
बाई तिण वेल़ाह आई बणी अन्नपूर्णा।
भड़ जितरा भेल़ाह, वल़ तै पूर्यो बीसहथ।।34
छत्रधर फौज छकाय, सांप्रत दोयां सोगरां।
प्रघल़ कूलडी पाय, वल़ मही सत्थ बीसहथ।।35
पितु रै जदै पनंग, पग लड़ियो वो पापियो।
आछो कीनो अंग, वेल़ा तिण ही बीसहथ।।36
साचो अणंद सुथार, कीणां काढै कूपरी।
भोल़ायो मा भार, बणै सहायक बीसहथ।।37
वो लैवत वारोह, तण निज सारी तैवतां।
थल़ धरणी थारोह, वर उर नामो बीसहथ।।38
बोदी वरत बटाक, तटकै कर लग तूटगी।
जोगण जदै झटाक, बैमुख झाली बीसहथ।।39
अणंदै नै उणवार काढ्यो कोहर कूकतो।
सकल़ाई संसार, वसुधा पसरी बीसहथ।।40
धिन धिन धरती धाट, बैनां सूं मिल़बा वल़ी।
वप तैं धर्यो विराट, वेल़ा तिण ही बीसहथ।।41
आछो रच आवास, जंगल़धर में जोगणी।
बोरड़ियां में वास, बैठी कर तूं बीसहथ।।42
विणती तोनै बीसहथ-गिरधरदान रतनू दासोड़ी
वरधर बोरड़ियांह, सुर विरछां सी सांप्रत।
धरती धोरड़ियांह, बणी सुरंगी बीसहथ।।43
छतियै वन छायोह, हर दिस कर हरियाल़ियां।
थल़वट तैं थायोह, वनरावन सो बीसहथ।।4
बेखी बीकाणैह, थोथै थल़वट देसमें।
देवी देसाणैह, बांठै बांठै बीसहथ।।45
ओटो ओयणरोह, जिण लीनो मन जुगत सूं।
डर भव दोयणरोह, व्यापै कदै न बीसहथ।।46
रजत सरीखी रेत, मह राजै मेहासधू।
लाड राख पख लेत, बाल़कियां नित बीसहथ।।47
छाया तर छाईह, देवधरा देसाण में।
महियल़ मेहाईह, बैठी सांप्रत बीसहथ।।48
क्यूं जा्वां केदार, की मथुरा कासी कहो।
सकल़ धाम, सँसार, वसू देसाणै बीसहथ।।49
हे करनी! कहतांह, दिल थारै उमड़ै दया।
रात दिवस रटतांह, बणै पोबारा बीसहथ।।50
और नहीं आणूंह, दुनी सकल़ के देवता।
जोगण हूं जाणूंह, वाहर तोनै.बीसहथ।।51
कमरै वाल़ा कंध, भचकै भांग्या भगवती।
कीरत जैत कमंध, वल़ तैं दीनी बीसहथ।।52
हित सांपू हेलोह, तैं सुणियो कांना तरां।
गहियो झट गेलोह, वाल़ण गायां बीसहथ।।53
सुरभ्यां वाल़ी साद, कड़की लारै काल़ियै।
मही थपण मरजाद, वाल़ी गायां बीसहथ।।54
धिन तन सँवल़ी धार, पैथड़ पटक पछाड़ियो।
बसुधा व्ही बल़िहार, बल़ थारै पर बीसहथ।।55
थिर निज सेवग थाप, दसरथ वाल़ी देवल़ी।
धर साची धणियाप, वा रँग पाल़ी बीसहथ।।56
पांगल़ वाल़ो पाव, चटकै तूटो चौथरो।
आछो कियो उपाव, बण कारीगर बीसहथ।।57
पांगल़ मग पड़ियोह, भचकै डगतो भागनै।
जो मेखां जड़ियोह, विड़ँग चौथ रो बीसहथ।।58
जादम जबरालोह, जेल़ां में जकड़ीजियो।
छूटो छतराल़ोह, वर शेखो तो बीसहथ।।59
बातां बीकानेर, जग तैं राखी जीतरी।
डाढाल़ी वा देर, बणी कदै ना बीसहथ।।60
जोधै ऊपर जोय, चिड़ियो चिड़ियानाथ तद।
करी न बीजै कोय, वाहर तैं बिन बीसहथ।।61
बुधपण वडम विचार, अमर जोधै नैं आखियो।
आई इक आधार, बसै जँगल़धर बीसहथ।।62
अमरो कव आयोह तनै जोधाणै तेड़बा।
बाई बतल़ायोह, बंधव कहनैं बीसहथ।।63
निजकर दीनी नीव जंगै गढ जोधाण री।
पह मन गयो पतीव, बल़ कल़ थारै बीसहथ।।64
अमरै पर आईह, अणहद रीझी ईसरी।
वीदग वरदाईह, बाई कीनो बीसहथ।।65
लागै नाही लाय, ओल़ा पड़ै न अवनपर।
छतो रोग नी छाय, वर ओ दीधो बीसहथ।।66
तांबापत्र तिणवार, मुरधर नगर मथाण रो।
चाखड़ियां तल़ चा’र बिणनै दीनो बीसहथ।।67
लागा अमरै लैर, थिर सह बातां थाट रा।
करनी वाल़ो कैर, बणियो छायां बीसहथ।।68
जल़ वो खारो जोय, गजब दासुड़ी गांम रो।
कूप तिणी रो कोय, बाकल़ न पितो बीसहथ।।69
दिन मुर धरणो देय, बलु जोड़ायत बैठगी।
लोहड़धर पख लेय, वर्व्यो कूओ बीसहथ।।70
निरमल़ कीधौ नीर, नमो दासुड़ी नेस रो।
खमा सरीखो खीर, वसुधा पीवै बीसहथ।।71
सांप्रत वो साखीह, करनीसर अज लग कहो।
रंग माता राखीह, विदगां बाजी बीससथ।।72
गुणियण गिरधरदान, दूहा बाहोतर दाखिया।
माता आ तो मान, वँदना काली बीसहथ।।73
~~गिरधरदान रतनू “दासोडी”

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