भाई रे मिनखां भाई!

mukhota

भाई रे मिनखां भाई!
थांरी बुद्धि रो थाग
नीं लाधै
बापड़ै बूढै विधाता नै!
बो फरोल़ो है
आपरी झीर-झीर जूनी बही रा पाना
जिणमें कठै ई
कदास लाध जावै कोई ओल़ी
कै
बी कांई लिखियो हो?
थांरी जबान री पकड़
अर अकड़ रै सारु।
डोकरियो देखणी चावै है
कै उण कितरा रंग दिया हा
थांनै रंगीजण सारु?
जिकां में थे कितरै रंगां सूं
रंगीज्या हो?
अर बोल सको हो
कितरै मूंडां सूं?
बापड़ै बूढै नै पड़ै है अबल़ेखो!
थांरा विध-विध रा उणियारा देख
जगत नैं जाणणियो
चोगी ई डाफाचूक हो जावै
बो नीं कर सकै निसचै
कै थांरा कितरा है उणियारा?
कद, कुणसो बदलल़ो?
इणी गतागम में है
बापड़ो बूढो जोगी
झांवल़ा खावतो।
बो नीं जाणै कै
थांरी अकड़
तो फगत भूसण तांई है
अर
जबान री पकड़ तो!
मीठोड़ै टेरां तांई!!
जद ई तो नीं पड़ै
थांरी गत री गतागम
क्यूंकै
थे तो थे ई हो!
थांरी लीला कुण लख सकै है?
थे भोरां माथै भणको!
दुरकारियां ई हिलावो हो पूंछ!
माजनो राख र जावो हो
सामलै रै घरै
जदै ई तो माजनो पाड़ियां ई
काढता रैवो हो बत्तीसी!!
थे खावता रैवो हो ऐंठो
मीठै रै ताण!
बिनां गिलाण रै!
थे भरियै बजारां कैय सको हो
कै जीब तो चामड़ी रो लोथो है
बिनां हाड रो!
आंटो खावती ई रैवै है
आपरै लिपल़ापणै रै पाण!!
आ तो लडखड़ती ई रैवै है।
आ सुण बापड़ो विधाता
निसासो नाख
करदै बही बंद
अर हाथ ऊंचा कर
बोल पड़ै
कै
भाई रे मिनखां भाई!
पगड़ै कंई तो साझ कंई!!

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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