भैरव नाथ रो छंद – जयसिंह सिंहढायच, मंदा, राजसमंद

।।दोहा।।
चंडी रा चेला चतुर, जुगल रूप जगभूप।
अवतारी हरि अज तणा,सांवल़ गौर सरूप।।१
रूप रुपाल़ा रूद्र रा, अखिल सगत अगवांण।
मद छकिया मन भावणा,जुगल जौड़ जग जांण।।२
भ्रात जोड़ मन भावणी, श्यामल़ गौर किशोर।
भल़हल़ इम भेल़ा दिपै,भांण जुगल जिम भोर।।३

।।छंद – त्रिभंगी।।
मामा मतवाल़ा, गोरा काल़ा, लाज रूखाल़ा, लटियाल़ा।
कायम किरपाल़ा, भीम भुजाल़ा,विरद विलाल़ा,विरदाल़ा।
जोगेस जटाल़ा, मन मुदराल़ा, आभ उजाल़ा,भाण समो।
जय जय जग सामी, अमर अमामी ,नामी भैरव नाथ नमो।।१
जिय भेल़े भैरव भ्रात नमो।।

जय जय जुग रूपं, जोड़ अनूपं, सत व्रत श्रूपं, जग जूपं।
शुभ सांवल़ रूपं, गौर स्वरूपं, वीर विरूपं, भव भूपं।
काढण कलि कूपं, नेह निरूपं, बावन रूपं, परम प्रभो।
जय जय जग सामी, अमर अमामी ,नामी भैरव नाथ नमो।।२
जिय भेल़े भैरव भ्रात नमो।।

आई अगवाल़ा, धरम धजाल़ा, परम कृपाल़ा, प्रतिपाल़ा।
रंग रूप रूपाल़ा, तन तेजाल़ा,मदन लजाल़ा, मतवाल़ा।
पिवत भर प्याल़ा, हद मद हाल़ा, चित्त उजाल़ा, रास रमो।
जय जय जग सामी, अमर अमामी ,नामी भैरव नाथ नमो।।३
जिय भेल़े भैरव भ्रात नमो।।

भेल़ा बिहु भ्राता, रंग चख राता, रास रचाता, नवराता।
बडपण विखियाता,सब सुखदाता,संग सुहाता, जग माता।
दूजो कुण दाता, भाग्य विधाता,रिधि सिधि दाता,राज समो।
जय जय जग सामी, अमर अमामी ,नामी भैरव नाथ नमो।।४
जिय भेल़े भैरव भ्रात नमो।।

भल़कै कर भाल़ा, शूल़ विशाल़ा,डाक डमाल़ा, डमकाल़ा,
खप्पर खणकाल़ा,छाक छकाल़ा,पीवत हाल़ा,भर प्याला।
अरि मूल़ उखाल़ा,रण रमणाल़ा,कोप कराल़ा,दैत दमो।
जय जय जग सामी, अमर अमामी ,नामी भैरव नाथ नमो।।५
जिय भेल़े भैरव भ्रात नमो।।

हिरदै रा हीरा, ब्हैनड़ वीरा,विरद अमीरा ,बलबीरा।
सुख राखण सीरा,भांजत भीरा, आत अधीरा, रण धीरा।
गुण ग्यान गभीरा, न्याव नवीरा,नीरा खीरा, खैम खमो।
जय जय जग सामी, अमर अमामी ,नामी भैरव नाथ नमो।।६
जिय भेल़े भैरव भ्रात नमो।।

अरजी सुण आवण,विरद निभावण,दुख दझावण, द्रुत धावण।
जग मात रिझावण,गुण जस गावण ,स्वान सजावण,वपु बावन।
भगतां मन भावन, कीरत पावन,मदन लजावण, आभ अमो।
जय जय जग सामी, अमर अमामी ,नामी भैरव नाथ नमो।।७
जिय भेल़े भैरव भ्रात नमो।।

जोड़ी जग जांणी, शुभ वरदांनी,आद भवानी, अगवांणी।
अवतार अजोणी, अवढर दानी,मूरत मांणी, मन भांणी।
शरणे’जय’जांणी, मन क्रम वांणी,पूरण पाणी,सीस नमो।
जय जय जग सामी, अमर अमामी ,नामी भैरव नाथ नमो।।८
जिय भेल़े भैरव भ्रात नमो।।

।।दोहा।।
सांवल़ गौर सरूप में,सदा सुहावत साथ।
जुगल जोड़ सिरमौड़ सुर, नमो भैरवा नाथ।।

।।छप्पय।।
नमो भैरवा नाथ, नमो जय भीम भुजाल़ा।
नमो भैरवा नाथ, कँवर चाँवंड किरपाल़ा।
नमो भैरवा नाथ, शूल़ कर स्वान सुशोभित।
नमो भैरवा नाथ, प्रणत जन आसा पूरित।।
जय जोड़ जुगल वड़पण विमल, अखिल सगत अगवांण रै।
हित सरण करण अतुलित कृपा, आप सुजस अप्रमांण रै।

~~©जयसिंह सिंहढायच, मंदा, राजसमंद

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