🌷भँवर समोवड़ भांण!🌷

आद वरण री उतन आ, पुणां धरण पिछमांण।
सगत भगत घण सूरमा, उतपन किया अमांण।।1
अवनी आ आवड़ करी, पग रज मात पवीत।
रमी रास मन खास रँज, अहर निसा अघजीत।।2
आसकरण तिणराव उत, कुशललाभ कविराय।
सांगड़ रँगरेलो सिरै, ठावी कविता ठाय।।3
आसाणद ईसर अखां, सकव वडो हरसूर।
आणद करमाणद उठै, मही पात मसहूर।।4
हिव मीसण हरदासियो, देथो मथुरादास।
सकव बडै कथ सूजड़ै, जसरस लीधो जास।।5
धिन दूसल पावन धरा, छटा बिखेरण छंद।
मेहो वरधर मात रो, गुणियण गेहाणंद।।6
प्रसिद्ध करी धर पिछम री, ईसर मेहाणंद।
सही भँमर उण हेमसुत, च्यार लगाया चंद।।7
आखर टणका आखिया, उगती जोड़ अमांम।
सोरम पसर समीर सथ, नर जस मधुकर नांम।।8
गीत कवत्त दूहा गजब, सहज भाव सरसाय।
घटा भाद्रपद घुमड़ती, छंद छटा इम छाय।।9
सिरजण सकल़ समाज हित, सरबजनां समभाव।
भण रचना भँमरेश री, चित्त नित उपजै चाव।।10
पींगल़ डींगल़ में पटू, हेर हिंदी हिंदवांण।
रेणव राजस्थान रो, भँवर समोमड़ भांण।।11

इण सईकै रा बेजोड़ डिंगल़ कवि, श्रेष्ठ आधुनिक राजस्थानी कवितावां रा सिरजणहार, वरेण्य हिंदी रा सशक्त हस्ताक्षर श्रद्धेय भंवर दानजी बीठू ‘मधुकर’ झिणकली नै म्हारी विनम्र श्रद्धांजलि। नमन।

~~गिरधर दान रतनू दासोड़ी

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