भ्रमरावली – वंश भास्कर

जयपुर के कछवाहा राजा माधवसिंह की सेना तथा भरतपुर के जाट शासक जवाहरमल के मध्य माउंडा गाँव की रणभूमि में हुए युद्ध का वर्णन महाकवि सूर्यमल्ल मीसण रचित वंश भास्कर से:

।।भ्रमरावली।।
करकि करकि कोप तरकि तरकि तोप,
लरकि लरकि लोप करन लगी।
करखि करखि कत्ति परखि परखि पत्ति,
हरखि हरखि सत्ति हरन लगी।
समर लखन आय अमर गगन छाय,
भ्रमर सुमन भाय निकर जुरे।
सरजि सरजि सोक लरजि लरजि लोक,
बरजि बरजि ओक दिगन दुरे।।1।।

बढिग त्वरित बीर पढिग दरित पीर,
चढिग सरित सीर रुहिर रची।
सिलत उरन सेल मिलत फुरन मेल,
ठिलत खुरन ठेल मलप मची।
पिलत धुरन पेल भिलत छुरन भेल,
खिलत सुरन खेल लखन लगे।
हरखि हरखि हूर परखि परखि पूर,
करखि करखि सूर रखन लगे।।2।।

गहत गवरि गैल बहत गिरिस बैल,
सहत भरन सैल कहत फटें।
चहत भटन चैल दहत मनु कि तैल,
महत फबत फैल अगनि अटें।
त्रिकसि त्रिकसि तेग बिकसि बिकसि बेग,
निकसि निकसि नेग असुन लहें।
रपटि रपटि राजि झपटि झपटि आजि,
दपटि दपटि बाजि गजन गहें।।3।।

सरत जहर सूक टरत अहर टूक,
करत कहर कूक ककुप करी।
खिसकि खिसकि हत्थ चिसकि चिसकि मत्थ,
सिसकि सिसकि सत्थ दुरत दरी।
छलत बिसिख छाय घलत त्रिसिख घाय,
कलत निसिख काय भटन किते।
पकरि पकरि पाय जकरि जकरि काय,
नकरि नकरि हाय जपत जिते।।4।।

भचकि भचकि मुंड लचकि लचकि सुंड,
मचकि मचकि रुंड उछटि कटें।
भरकि भरकि भेट खरकि खरकि खेट,
धरकि धरकि पेट फलक फटें।
खटकि खटकि खग्ग चटकि चटकि अग्ग,
लटकि लटकि झग्ग मुखन झरें।
अटकि अटकि इद्ध गटकि गटकि गिद्ध,
छटकि छटकि बिद्ध बिसिख धरें।।5।।

भटकि भटकि घुम्मि झटकि झटकि झुम्मि,
पटकि पटकि भुम्मि घुटन घसें।
बटकि बटकि गुंड मटकि मटकि तुंड,
रटकि रटकि झुंड हुलसि हसें।
बिरचि बिरचि बान मिरचि मिरचि मान,
किरचि किरचि कान किरन लगे।
ललकि ललकि लाल झलकि झलकि हाल,
खलकि खलकि खाल फिरन लगे।।6।।

झनकि झनकि झोंर सनकि सुरभि सोंर,
भनकि गुटिन भोर भ्रमन लगे।
तरस खयद खेत परस रयद प्रेत,
दरस भयद देत दमन लगे।
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——————————–।।7।।

~~सूर्यमल्ल मीसण (वंश भास्कर)

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