चाल़कनेची का प्रहास शाणोर गीत – मीठा मीर डभाल

Chamunda

सरव परथम समरण मात तो शारदा,
रदे बीच भरोसो अडग राखूं !!
जीभ पर बिराजो आप मां जोगणी,
भवां चाळराय रा गुण भाखूं !!1!!
आप अम्ह बुद्धि बगसावजो आवड़ा,
करनल्ला मात तो महर कीजो !!
आपरो नाम लिय कर रहयो आपदा,
दयाळी उकत सध आप दीजो !!2!!
अधक महिमा इण ईळा म्ह आपरी,
सगती सरव जगत में आप साजो !!
तनां कहूं चाळका बाळको तिहारो,
थान सूं आय मां सहाय थाजो !!3!!
वखत पहलां तणी वात आ विदंगां,
ईळा पर आवियो समय ऐहड़ो !!
भाट अरज दाखवी आय भूपाळ ने,
नृप बतावो मोय कवि नेहड़ो !!4!!
कवि जो आय होड़ साथ म्हारे करै,
मुझ तणो हटावै गरव मोटो !!
प्रथीपत नहींतर हार मांनो परी,
खीतिपत राख नह मांण खोटो !!5!!
रौष नह कीजिये उतावळ रावजी,
भाट कव रीत रा वयण भाखो !!
विचारो दिलवसै सांभळो वातड़ी,
राव कां साव नह भाव राखो !!6!!
गुणी कव बोहो धरा गुजरात में,
शुकवीजन किरती करे सारी !!
जिकांह रे साहेजे सदाय जोगणी,
धर्यो खड़ग डाढाळी छत्रधारी !!7!!
कासद ने मेलयो कवि वरसड़ा कनें,
मावलजी हेत कर अरज मांनो !!
भाट होक्काट कर आवियो भाळवा,
कवि नह रहयो कां लियो कांनो !!8!!
आवियो वरसड़ो आख मोंय अधपति ,
ओ किम ऱाव आय हि हुओ कोपै !!
भजाळी तणो रख भरोसो भूपति,
लोवड़ियाळ लाज न मात लोपै !!9!!
बोहो कर गर्व जद भाट मुख बोलियो ,
चारण कवि होस तो आव सांमो !!
मंत्रां सूं बोलावै बाळ छः मास रो ,
करे बतावै आज ऐह कांमो !!10!!
मावल जद हेत कर सम्मरी मावड़ा,
आवड़ा इण वखत भीर आवो !!
लाज माहरी रख धारणी लोवड़ी,
दोह्यली घड़ी रो सुणो दावो !!11!!
भजाळी अरज ऐम सांभळै भवानी,
स्वपने में कहयो वैण साचो !!
बोलै बाळक आ तो जरियक बातड़ी,
कथूं हूं बोलावसूं कुंभ काचो !!12!!
रवि उगन्तां थकां गया सहु रावळै,
मावलजी करी जिका हौड मोटी !!
जीव व्हे जिका तो बोलन्ता जगत में,
करावूं गणणाट हूं कुंभ कोटी !!13!!
संभा बीच पाट जद मेलयो सेवकां,
जोवै सह मेदनी मिळै जाजी !!
भाट ओ थाट तो देखतां भड़कयो,
बोलावसौ कुंभ किम आज बाजी ?14!!
भाखै ईम भाट आ थाट ने भाळतां,
थाय कुंण वरसड़ा सहाय थारी !!
अजै तो कहूं हूं संभा रे आगळै,
स्वीकारो वात थई भूल सारी !!15!!
मन संशय करण लागेयो महपति ,
जो जीतीयो भट्ट तो पत जासी !!
आज उबारो बीस हत्थी आवड़ा,
थीं बीन कुंण मों सहाय थासी !!16!!
करो नह सौच ऐम मावल कहै ,
मात रो भरोसो हैं अडग मुन्नें !!
भमता कुंभ ने बोलन्तो भड़ाके,
तो रावजी मिळै नह राह तुन्नें !!17!!
वन्दन कर मात नें मावलजी विनवें,
जोगणी देखे किम लाज जातां !!
वार नह करी तो सांभळो वाढाळी,
प्राण नह रहसी आज पातां !!18!!
घुररर कर पाट जद लागयो घुमवा,
गणणण व्योम गणणाट गाजै !!
भणणाट नाद ऐम करायो भवानी,
वाजन्त्र छतीसां रा सुर वाजै !!19!!
हठीलो ध्रुजयो भाट कर हाकला,
मावलजी थई बोहो भूल म्हारी !!
पांव पकड़ने कूकीयो पौकदै ,
धणियाणीह चाळका बिरद धारी !!20!!
पलक में भाट ने पगां म्ह पाड़यो,
सवायोह बिरद जस द्वीप सातां !!
आंण वरतांणी चहुं लौक में आपरी,
वरसड़ा तणी रही अखियात वातां !!21!!
बिरद वधारण चारणा वरण रो ,
भाट रो गरव तें सेंग भांगो !!
मावल रे आगळै आय वो मावड़ी,
लाज लोपै झट पाय लागो !!22!!
चंडी ल्ये जनम उजळ वरण चारणां,
उबारणां काज अवतार आवै !!
माड़धर जनमी मांमड घर मावड़ी,
नैजाळी तिहारो थाग नावै !!23!!
लोवड़ियाळी हुई नवलक्ख चारणां,
थाय चहुं दिशा जयकार थारो !!
गावै गुण मीठियो मीर मां रावळा,
तरणी कर महर भवपार तारो !!24!!

~~मीठा मीर डभाल

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