चामुंडा माता रा त्रिभंगी छंद

Chamunda

।।दोहा।।
चामुंडा तुं चंडिका, तुंही मात अरु तात।
दयातणी तुम हो दधि, विधू सुधा विख्यात।।1।।
चामुंडा तुं चंडिका, आलौकिनी अखिलेश।
दैत दळ्या कळिया दणि, मीसण कथे महेश।।2।।

।।छंद – त्रिभंगी।।
असूरां सर कोपं, म्रजाद लोपं, खप्पर खोपं, धींखारी।
अरकां सम ओपं, मलकै मोपं, सिंघे चोपं किं स्वारी?
गिरा श्रुति गोपं, करे विलोपं, पद व्रत पापं, परजाळी।
चामुंडा चंडी, परम प्रचंडी, वैरि विहंडी, बिरदाळी।।1।।

माता डुंगरेची, चाळकनेची, आई रवेची, अवतारी।
आवड पथ एहची, भई रवेची, तुं पटुपेची, क्रीत क्यारी।
खोडल दळ खेची, विधरमवेची, पाप तत्व तुं दे ढाळी।
चामुंडा चंडी, परम प्रचंडी, वैरि विहंडी, बिरदाळी।।2।।

चारण कुळ चमकी, दामण दमकी, धर पर धमकी, श्रेयांशी।
झांझर पद झमकी, घुंघर घमकी, नुपूर ठमकी, प्रेयांशी।
सरपब्बै समकी, करपर कमकी, तब तव तमकी, पथपाळी।
चामुंडा चंडी, परम प्रचंडी, वैरि विहंडी, बिरदाळी।।3।।

धधकत रतधारं, खप्पर भारं, खडगां खाळं, खळ दळखां।
हेयं हिय हारं, असुरां डारं, महिखट मारं, लै वलखां।
रदनं रडि रारं, किय आहारं, भुजा अढारं, भृभाळी।
चामुंडा चंडी, परम प्रचंडी, वैरि विहंडी, बिरदाळी।।4।।

असि कसि तह कमरं, सुर कज समरं, लोचण भ्रमरं, चख चोळं।
खेहं चढि डमरं, विमाण अमरं, लगि पी रोळं रगदोळं।
धावै भयी तमरं, चीरत चमरं, दैतां डमरं दोखाळी।
चामुंडा चंडी, परम प्रचंडी, वैरि विहंडी, बिरदाळी।।5।।

तन नैन प्रसादं, टळे विसादं, सुणती सादं सरवांगी।
निरभय कल नादं, प्रलय प्रमादं, वाद विवादं, वरदांगी।
मुख भर्यो म्रजादं, आद अनादं, एक अलौकिक अरचाळी।
चामुंडा चंडी, परम प्रचंडी, वैरि विहंडी, बिरदाळी।।6।।

रुप औ गुण राशि, शुभ चित्त श्वासी, हो अविनाशी, अवकाशी।
उधमव्रत आशी, नहीं निराशी, वेद विलासी, विधाशी।
तुं तत्व उपासी, शील री सासी, भाग्य भासी, भरमाळी।
चामुंडा चंडी, परम प्रचंडी, वैरि विहंडी, बिरदाळी।।7।।

नासै सब क्लेशं, दळती द्वैषं, वाक विशेषं विचरती।
हरि हर ब्रह्मेशं, शारद शेषं, शुचि सिधेशं, संचरती।
मीसण माहेशं, भाव भरेशं, उर अधिकेशं, अलकाळी।
चामुंडा चंडी, परम प्रचंडी, वैरि विहंडी, बिरदाळी।।8।।

।।छप्पय।।
दैत कोटि धा दळे, रक्त हले मुंड सरिता।
तुंड कुंड मंह तरै, कच्छ ज्युं क्रीड करीता।
असि चमकत धुति ओप, कोप क्रुर दबपर कीन्हो।
प्रबल असूर मसल्ल, दंड दूरजन को दीन्हो।
विकराळ व्योम तक तुं बसी, पूरण मां परमार्थनी।
चामुंड मात मम चित्त बसो, मीसन महेश गुण अर्थनी

~~महेशदान मीसण मोरबी

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