चामुंडा माताजी रो डिंगळ गीत – कवि राघवदान जबरदान देवका

Chamunda

प्रणमो प्रेमे महाप्रचंडी।
चरिताळी चामुंडा चंडी।
छप्पन कोटि रुप कराळी।
चरण नमूं चोटीला वाळी।
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥1॥

महा समरथ तुंही मंहमाया।
चवदह ब्रहमंड तुं सुरराया।
महिखमारणी तुं महाकाळी ।
चरण नमूं चोटिला वाळी।
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥2॥

आद शगत तूं सचराचरणी।
अलख अनादि तारण तरणी ।
जय जबरी जगदंब जोराळी।
चरण नमूं चोटिला वाळी
चरण नमूं मां सूंधावाळी॥3॥

महा जोगण मां तुं मछराळी।
खडग त्रशूळ लियां खपराळी।
डुंगर माथै थान डाढाळी।
चरण नमूं चोटीला वाळी।
चरण नमूं मां सुंधा वाळी॥4॥

झळहळ जोत तुंही जगदंबा।
आभा मंडळ री अवलंबा।
नव दुरगा नव लाख नेजाळी।
चरण नमूं चोटिला वाळी ।
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥5॥

अखूट अखंडी तूं अनपूरण।
अढळक दाणी आशापुरण।
उदो उदो आरासुर वाळी।
चरण नमूं चोटिला वाळी ।
चरण नमूं मां सुंधा वाळी॥6॥

रिध सिध मा चरण मै रमती।
नौनिध्धि समरुध्धि नमती।
धिन धिन मां तुं धाबळवाळी।
चरण नमूं चोटिला वाळी।
चरण नमूं मां सुंधा वाळी॥7॥

संकट हरणी तुं सुखदाता।
अशरण शरणी सेवक त्राता।
परसन रहिजो मां परचाळी।
चरण नमूं चोटीला वाळी।
चरण नमूं मा सूंधा वाळी॥8॥

आनंद दाता अभय प्रदाता।
सुख संपत मा दीजो साता।
म्हेर करे तुं माटेल वाळी।
चरण नमूं चोटीला वाळी।
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥9॥

प्रगट प्रगल्भा पुण्य प्रकाशी।
चारण देवि वडी चौरासी।
वाहर करजै वीस भुजाळी।
चरण नमूं चोटिला वाळी
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥10॥

आंख्या सूं झरती अमी धारा ।
रुप अलौकिक तेज अपारा।
बार बार वंदन बिरदाळी।
चरण नमूं चोटिला वाळी ।
चरण नमूं मां सुंधा वाळी॥11॥

गरवां रूप भजूं छुं गूढी।
बेलप करवा आवो बुढी।
पांय पडुं मां पंजावाळी।
चरण नमूं चोटिला वाळी।
चरण नमूं मा सूंधा वाळी॥12॥

दीन दुःखी री मात दयाळी।
क्लेश कापजै मां करुणाळी।
लाज निभाजै लोवडियाळी।
चरण नमूं चोटीला वाळी।
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥13॥

अरज सुणै अवलंब अमारी।
श्रध्धा ताहरी है सुखकारी।
रहम लाय उर कर रखवाळी ।
चरण नमूं चोटिला वाळी ।
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥14॥

अंबा तुं है अंतरजामी।
सांची मात पिता अर स्वामी
आव उपरो मो अघटाळी।
चरण नमूं चोटिला वाळी।
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥15॥

मेटो तन मन पीडा माजी।
राघव पर नित रहजो राजी।
करजोडै करगरौ कृपाळी।
चरण नमूं चोटिला वाळी।
चरण नमूं मां सूंधा वाळी॥16॥

॥दोहा॥
नकळंक नेजा फरहरै, शिखर ख्यात सुख्यात।
सीस नमावूं चरण मंह, प्रणमुं प्रेमे मात॥1॥
आद शगत अखिलेशरी, प्रगट देवी प्रख्यात ।
भगतां रा दुःख भाजणी, प्रणमुं प्रेमे मात॥2॥

॥छप्पय॥
जय चामुण्डा मात, रात दिन रक्षा करजो।
जय चामुण्डा मात, दुःख दारिदर हरजो।
जय चामुण्डा मात, श्री सुख शांति दीजो।
जय चामुण्डा मात, हमैशा राजि रहजो।
कुळदेवी तो पाय पडुं, अशरण शरणी आप हो।
“राघव” पर करुणा करो, छिमा गुना मां बाप हो॥1॥

~~कवि राघवदान जबरदान देवका

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