चारण साहित्य का इतिहास – डॉ. मोहन लाल जिज्ञासु


भाग १ – अनुक्रमणिका (शीर्षक पर क्लिक करें)

पहला अध्याय – विषय प्रवेश

दूसरा अध्याय – चारण साहित्य की पृष्ठभूमि (सन ६५०-११५० ई.)

तीसरा अध्याय – प्राचीन काल (सन ११५०-१५०० ई.)

चौथा अध्याय – मध्यकाल, प्रथम उत्थान (१५००- १६५० ई.)

पांचवाँ अध्याय – मध्यकाल, द्वितीय उत्थान (सन १६५०-१८०० ई.)

भाग २ – अनुक्रमणिका (शीर्षक पर क्लिक करें)

छठा अध्याय – आधुनिक काल, प्रथम उत्थान (सन् १८००-१८५० ई०)

सातवाँ अध्याय – आधुनिक काल, द्वितीय उत्थान (सन् १८५०- १९५० ई०)

आठवाँ अध्याय – चारण काव्य का नव-चरण (सन् १९५० – १९७५ ई०)

[…]* संशोधित

9 comments

  • रतन सिंह चंपावत

    सादर जय मां करणी जी की।

    रतन सिंह चाँपावत विट्ठलदासोत “रणसीगांव रा आपनै घणै मान जवारड़ा।

    इतिहास अर साहित नै सहेजण री आ घणी ओपती अर अंंजस जोग खेंंचल है ।
    आपने घणै मान बधाई

  • Charan Lala

    Vah very good
    Jai Charan Sakti

  • Shambhusingh chahdot Barahath

    जय माता जी की बहुत बढ़िया जानकारी दी है होकम।

  • Balwant Deval

    जिज्ञासु जी की मेहनत को कोटि कोटि वंदन।
    इस पुस्तक को अगर हम खरीदना चाहे तो कंहा ओर कैसे सम्पर्क करना होगा।
    कृपया उचित मार्गदर्शन करें।

    • राजस्थानी ग्रंथागार जोधपुर में मिल सकती है हुकम। उनका नंबर है 9414100334

  • Mahendra singh

    साधुवाद

  • पुष्पेंद्र जुगतावत

    यह ग्रन्थ अत्यधिक श्रमसाधना का परिणाम है। इसका सुलभ होना स्वागत योग्य है।

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