चारण शाखाए

चारण जाति की मुख्य तेवीस शाखाए हें। कुछ लोग इसकी गिनती एक सो बीस बताते हें, लेकिन मुख्य तेवीस हें। उपशाखाए ५६७ हें अंत शाखाओ की गिनती नही हें।

जो अखावत, लखावत, इशरावत, जुगतावत, अमरावत आदि योग पुरुषों के नाम गोत्र हें।

१. मारू शाख: ५२ उपशाखा, इसमे मुख्य कोचर, देथा, सोदा, सीलगा, सुरतानिया, कीनिया आदि।
२. सऊवा शाख: ४७ उपशाखाइसमे मुख्य, इसमे मुख्य वरसडा, गोड़, सताल, मातंग, माणकव आदि।
३. बाटी शाख: ३० उपशाखा, इसमे मुख्य गाडन, सेलगडा, भसिया आदि।
४. तुबैल शाख: २० उपशाखा, इसमे मुख्य गुगडा, लखाणी, रागी, वेश आदि।
५. वाचा शाख: १६ उपशाखा, इसमे मुख्य आढा, महिया, सांदू आदि।
६. मीसण शाख: १६ उपशाखा, इसमे मुख्य मेगु, देमाल, तमर आदि।
७. ढाकरिया शाख: २४ उपशाखा, इसमे मुख्य कटारिया, अमोतिया, खेता, गोधा, गिरिया आदि।
८. जाखला शाख: ४ उपशाखा, इसमे मुख्य खलेल, महिसुर, झमाल आदि।
९. चौराडा शाख: ८४ उपशाखा, इसमे मुख्य कविया, खडिया, थेहड़, चीबा आदि।
१०. गुनायच शाख: १४ उपशाखा, इसमे मुख्य गंगाणीय, सियाल, मालेधा आदि।
११. टापरिया शाख: 1३ उपशाखा, इसमे मुख्य शशिमाल, आतुल, जाखा आदि।
१२. भाचलिया शाख: १६ उपशाखा, इसमे मुख्य सिन्ढायच, उज्जवल, मजीढीया आदि।
१३. नरा शाख: ८४ उपशाखा, इसमे मुख्य कविया, खिडिया, चीता, थेहड़ आदि।
१४. अवसुरा शाख: ५५ उपशाखा, इसमे मुख्य आसिया, मुवड़, सुगा, देभल, वणसुर आदि।
१५. नैया शाख: १६ उपशाखा, इसमे मुख्य सीया, सीसटया, थाम्भा आदि।
१६. धांधणिया शाख: १६ उपशाखा, इसमे मुख्य अमर, गोघट, सुमणा आदि।
१७. पुनड़ा शाख: १३ उपशाखा, इसमे मुख्य पुनड़, विजड़ आदि।
१८. लीला शाख: ६ उपशाखा,
१९. आसणिया शाख: १७ उपशाखा,
२०. केशरिया शाख: १३ उपशाखा, इसमे मुख्य मेह्डू, महियारिया, केशरिया, मोकल आदि।
२१. मादा शाख: ६ उपशाखा, इसमे मुख्य बाला, ढिकरया, बीझड़ आदि।
२२. रतनु शाख: ४१ उपशाखा, इसमे मुख्य गरवा, नाला, गंग, नर,
२३. रोह्ड़ीया शाख: १२ उपशाखा, इसमे मुख्य बीठू, कलहट, गादु, पुनसी, हड़वेचा, सावल, मीकस, धीरण, होहणीया, ओलेचा, पातरोड़, आला,

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