चारणों के गाँव – मिरगेसर (मृगेश्वर)

मृगेश्वर का ताम्र-पत्र

महाराणा प्रताप द्वारा प्रदत्त प्रस्तुत ताम्रपत्र मुंशी देवीप्रसाद हो प्राप्त हुआ था। जिसको उन्होने सरस्वती, भाग १८ पृष्ठ ९५-९८ पर प्रकाशित करवाया। ताम्रपत्र में कुल ७ पंक्तियां हैं। ताम्रपत्र से ज्ञात होता है कि महाराणा प्रताप के आदेश से, भामाशाह द्वारा कान्हा नामक चारण को फाल्गुन शुक्ला ५ संवत् १६३९ को मीरघेसर (मृगेश्वर) नाम ग्राम प्रदान किया गया था। कान्हा सांदू चारण था व चित्तौड़ के निकट हुम्पाखेड़ी नामक ग्राम का निवासी था। हल्दीघाटी के युद्ध में यह महाराणा के साथ था। उस युद्ध का ओजस्वी वर्णन इसने अपने एक गीत में किया है। इस ताम्रपत्र का दन्ताल पत्र भी मुंशी देवीप्रसाद जी ने प्राप्त किया था। ताम्रपत्र के मसविदे को कंठस्थ करने हेतु उसे पद्यबद्ध कर लिया जाता था, उसी पद्य को दन्ताल पत्र कहा जाता है। दन्ताल पत्र में ताम्रपत्र के विषय को समाविष्ट करते हुए उक्त तिथि को गुरूवार भी बताया गया है। लेकिन तिथि पत्रक से ज्ञात होता है कि उक्त तिथि को गुरूवार नहीं वरन् शनिवार था। ताम्र पत्र का मूल पाठ निम्नानुसार है:-

१. महाराजधिराज महरा-
२. णा श्री प्रताप स्यंघजी आदे
३. सातु चारण कान्हा हे गाम
४. मीरघेसर दत्त मया कीधो
५. आघाट करे दीधो संवत् १६३९ वर्षे
६. फागुण सुदी ५ दुए श्री
७. मुख वीदमान साह भामासाह

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