छँद देवल रो – कविराज जुँझारदान जी दैथा ‘मीठड़िया’

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।।दूहा।।
अवरळ वॉणी उर वसौ मात चण्डी मँहमाय ।
आखों दैवळ औपमा रूप गिरॉ सुरराय ।।१।।

🌹छँद रौमकँद🌹
सुरराय सदा अघ मेटण सॉप्रत पाय नमौ पह रीत पणॉ ।
रवराय देवी दुरगा वड राजत धाय दियायत खाय घणॉ ।।
सैवकॉ पर साय उपाय साधारण जौत धुबाय तुँ आय जिनूं ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं ।।१।।
।।टैर:- जिय दैवल राजत रूप दिनों ।

कौयळा चँद्रकूँप अघम कळाधर कुँड अघौर में घौर क्रमे।
अकळाकळ पँथ अमौघ अपँपर रूप सतॉदिप राय रमै ।।
महिमा मँडळीक नवै खँड मँडण खँडण दॉणव खल्ल खनूं।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं ।।२।।
।।टैर:- जिय दैवल राजत रूप दिनों ।

हिंगळाज विसॉहथ चूँड़ हळौहळ भुज भळौभळ साथ भळै ।
ब्रहमन्ड चळौचळ यूँ घर भूंगर दैत खळॉ दळ दुक्ख दळै ।।
निम नाच वळौवळ राच निरम्मळ विम्मळ तेज सदा बरणू ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं।।३।।
।।टैर:- जिय दैवल राजत रूप दिनों ।

बीसौ हथवाळिय वीस भुजाळिय काळिय कैहर पीठ कसै ।
डमकै डमराळिय देव डढ़ाळिय वीर संचाळिय भैर वसै ।।
त्रिहुँ लौक उजाळिय भैरव ताळिय धाबळ वाळिय धाय धिनूं ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं ।।४।।
।।टैर:- जिय दैवल राजत रूप दिनों ।

वर डाक वजाइय खैतळ भाइय हाक हवाइय धाक हलै ।
उमॉ मिळ आइय चौसठ चाइय मामड़ियाइय तैथ मिलै ।।
रमती सुरराइय रास रचाइय तूँ भलियाइय लौक तिनों ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं ।।५।।
।।टैर:- जिय दैवल राजत रूप दिनों ।

सुर थॉन बैठी पॉन पान शिरौमण मॉनसरा गिरमैर मिळी ।
तिरथॉ पर पाप हरै तुँहि तारण शिखर थॉन सुँदै समळी ।।
कर क्रौड़ छप्पन चामँड कळाकळ असुर भांज दबै अरनूं ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं ।।६।।
।।टैर:- जिय दैवल राजत रूप दिनों ।

पावे गिरनार, आबू गिर तूं पत, गढ दांता पे अम्बा गरवी ।
चड़ोधरराय असापुर चॉंमंड रौडळ रास विलास रवी ।।
किवळाश रमै इधकी टिप कैसर वासर भास कळा वदनो ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं ।।७।।
।।टैर:- जिय दैवल राजत रूप दिनों ।

पँइयाळ त्रहूँ पर आरँभ पावन चौसठ खैळ अकाश चढ़ै ।
नवभास गजै बजै त्रिव्वज नैवर तारँग रास गिरॉ तैमड़ै ।।
भव पाळ उपाय अजौनि त्रिभूवन गूण तिनॉ विन पार गनूं ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं ।।८।।
।।टैर:- जिय दैवल राजत रूप दिनों ।

अँग आद जुगाद अनाद अवच्चळ साद कियों त्रिहूंलोक सुणै ।
शिव नाद वसै सथ आदि इन्द्रा सुर तादष्ट वैदन वाद तणै ।।
खट माद खँडाळ लियॉ अग्र खैतल भॉँण दुवाहिय तेण भणू ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं ।।९।।
।।टैर:- जिय दैवल राजत रूप दिनों ।

जुगधार जन्म कै वार किया जस पार प्रवाड़य कूँण पुजै ।
दरबार महीपत माड़ धरा’धिनुं वार अपूठिय धार विजै ।।
जद व्रन अढार दिया, कर जादम, कायम राज जुगॉ करणूँ ।
शगतॉ नवलाख झूळॉ विच शौभत दैवळ राजत देव धिनूं ।।१०।।
।।टैर:-जिय दैवल राजत रूप दिनों ।

मड़वै अवतार लियौ महमाइय थान खरौड़ सुथॉन थपै ।
वड व्रीद विसौतर लाज वधारण साबत राज सौढों समपै ।।
विसो कर रॉँण सराप्यो वीरम अमर कोट अखी अपणूं ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं ।।११।।
।।टैर:- जिय दैवल राजत रूप दिनों ।

हरबंब हरै बर बौल करै कर काम काळुझर बंद कियो
नर भीम नरैसर गूड्डर के नर देश परेकर थाप दियौ ।।
वरदॉन देवी वर ऐम अखी कर सीम सरा धर दै शरणूं ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं ।।१२।।
।।टैर:- जिय दैवल राजत रूप दिनों ।

शगती सवळीय नवै ग्रह सावळ पीड़ न चौर न ऑट पड़ै ।
दिन दिन वधै घर प्रग्घळ दौलत सावळ व्रिद सौभाग चड़ै ।।
नवेनिद्ध दियै नित नित भवॉनिय थाट रिद्धी सिद्धि आप थणूं ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत देव धिनूं।।१३।।
।।टैर :- जिय दैवल राजत रूप दिनो ।

धिन माल मुलक्क दियै धणियॉणिय गौरस गाम गिरास घणा ।
बरहास हुकक्म विधा वसुधा वर तापर व्रिद सभाग तणा ।।
शुभ वास सुरन्द विभौ सुख सम्मपत राजस पास सदा रहणूं ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत दैवल राजत दैव धिनूं ।।१४।।
।।टैर:- जिय देवल राजत रूप दिनो ।

सिमरण्ण करूँ भिन भिन्न देवी सुण विग्घन हैरण दिन्न वळै ।
अन धन्न अखूट भँडार भरै अत मॉन सुँ भौजन ऑण मिळै ।।
दुरजन्न मिटै दुख दाळद्र दॉँणव मॉनव को न हुँ ओर मनूं ।
शगतॉ नवलाख झूलॉ विच शौभत देवल राजत देव धिनूं ।।१५।।
।।टैर:- जिय देवल राजत रूप दिनो ।

कळश-छप्पय
दैवल राज वड देव सैव कियॉ सुख उपजै ।
नित नित राखौ नैम (भलियाळी)भीड़ दाळद दुख भँजै ।।
गँजै न सीमॉ गॉम नॉम रहै नवखँड नरॉ ।
दूध दही घर दॉम परिवार पुन्न वधै पुरॉ।।
सबसबभलिया सिद्धू होयजौ भीर औपर करजौ नित आई ।
देवला देव ‘जुँझियौ’ दाखै सहाय करौ सुरराई ।।१।।

~~कविराज जुँझारदान जी दैथा ‘मीठड़िया’

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