छंद शेखर रासाष्टक चंचरीक(चर्चरी)छंद

।।छंग – चर्चरी / चंचरीक।।

इक निशि ससि अति उजास, प्रौढ शरद रूतु प्रकास,
रमन रास जग निवास, चित विलास कीन्है।
मुरली धुन अति रसाल, गहरे सुर कर गुपाल,
तान मान सुभग ताल, मन मराल लिन्है।
ब्रह्मतिय सुन भर उछाव, बन ठन तन अति बनाव,
चितवत गत नृत उछाव, हाव भाव साचै।
हरि हर अज हेर हेर, बिकसित सुर बेर बेर,
फरगट घट फेर फेर, नटवर नाचै।।१

ठें ठें बजि त्रंबक ठौर, चें चें शहनाई शोर,
घें घें बजि प्रणव घें घ, घें घें बोलै।
झुक झुक झुक बजत झांझ, टुक टुक मंजीर रंज,
डुक डुक उपंग चंग, अति उमंग डोले।
द्रगडदा द्रगडदा पखाज, थगडदा थै थै समाज,
कडकडदा कडकडदा, दुकड त्रुकड थन घट राचै।
हरि हर अज हेर हेर, बिकसित सुर बेर बेर,
फरगट घट फेर फेर, नटवर नाचै।।२

संतन अभिराम धाम, क्रमत रमत भ्रमत काम,
प्रमत श्रमत नमत गाम, वाम हाम लोभै।
अटन घटन अति उदाम, थन गन तन ठाम ठाम,
तज बिश्राम अति बिसाम, श्याम सुंदर सोहै।
जमुना के नीर तीर, खेलत बलबीर बीर,
चहुवट थक सघट भीर, कटि सुधीर काचै।
हरि हर अज हेर हेर, बिकसित सुर बेर बेर,
फरगट घट फेर फेर, नटवर नाचै।।३

झल़़ल़ तन कांति झल़क, खल़ल़ भुज चुड खल़क,
सल़ल़ल़ जिहि बीज सल़क, भल़ल़ भाल साजै।
अट पट लट छूट अलक, तरघट शुभ कीन्ह तिलक,
हट हट घट त्रुघट हलक, नट बिलास राजै।
तन तन प्रति सुगत तान, जन जन मन एक जान,
क्रत उत मुख कान कान, मान गान माचै।
हरि हर अज हेर हेर, बिकसित सुर बेर बेर,
फरगट घट फेर फेर, नटवर नाचै।।४

घम घम घुंघरु घमंक, ठममं झांझर छमंक,
धमम धम भू धमंक, गत निशंक गावै।
झग झग झग जगमगाट, थग थग थै थै तथाट,
नौतम पग द्रग निराट, ललित नाट लावै।
लथ बथ हथ गुंथ लीन, पथ पथ प्रिय सथ प्रबीन,
कथ कथ ग्रथ शेष कीन, जुथ नवीन जाँचै।
हरि हर अज हेर हेर, बिकसित सुर बेर बेर,
फरगट घट फेर फेर, नटवर नाचै।।५

नौतम छबि नंद नंद, मुख सुहास मंद मंद,
दंपति जुत द्वंद द्वंद, जगत वंद डोलै।
वनिता सुर वृंद वृंद, निरखत आनंद कंद,
गति अति स्वच्छंद छंद, जय जय बोलै।
जुगलित कर जोर जोर, ठमक झमक ठौर ठौर,
विमल तान तोर घोर, मुरली बाचै।
हरि हर अज हेर हेर, बिकसित सुर बेर बेर,
फरगट घट फेर फेर, नटवर नाचै।।६

लख छबि सुरपति लजीत, गुह्य गान तान गीत,
प्रियतम प्रिय सहित प्रीत, समरजीत शोभै।
रमत भ्रमत अजब रीत, चकित झुकित थकित चित्त,
ललित हलित मलित लीत, निरख मीत लोभै।
लुंब झुंब एक लगन, विमलित द्रग जात विघन,
तक तक चक होत तगन, प्रौढ मगन प्राचै।
हरि हर अज हेर हेर, बिकसित सुर बेर बेर,
फरगट घट फेर फेर, नटवर नाचै।।७

तत तत तत होत तान, अचुबित गत आन आन,
धुरजटि घट छुटत ध्यान, कान बान सुनते।
गहरी धुन होत गान, मंगल सुर मान मान,
भूल भान खान पान, प्रान जान भरतें।
धिधिकट नृत धार धार, त्रिमित तहँ सितार तार,
ब्रह्मानंद बार बार, चरनन चित राचै।
हरि हर अज हेर हेर, बिकसित सुर बेर बेर,
फरगट घट फेर फेर, नटवर नाचै।।८

~~ब्रह्मानंद स्वामी 

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