छंद शेखर श्री रासाष्टक रेणकी छंद

🌸दोहा🌸
एक समय शशि उदित अति, हुय मन अधिक हुलास|
जमना तट ब्रजनार जुत, रच्यौ मनोहर रास||१
भर भर तन सज आभरण,वर वन करण विहार|
कर कर ग्रह नटवर कृषण,सर सर अनुसर सार||२

🌸छंद रेणंकी🌸
सर सर पर सधर अनर तर अनुसर,कर कर वर घर मेल करे|
हरि हर सुर अवर अछर अति मनहर,भर भर अति उर हरख भरे|
निरखत नर प्रवर प्रवर गण निरजर,निकट मुकुट सिर सवर नमें|
घण रव पट फरर फरर पद घुंघर, रंग भर सुंदर श्याम रमें| १

झणणणण झणण खणण पद झांझर,गोम धणण गणणण गयणे|
तणणण बज तंत ठणण टंकारव,रणणण सुर धणणण रयणे|
त्रह त्रह अति त्रणण घणण अति त्रांसा,भ्रमण भमरवत रमण भमें|
घण रव पट फरर फरर पद घुंघर, रंग भर सुंदर श्याम रमें| २

झटपट पट उलट पलट नटवत झट,लट पट कट घट निपट लल़े|
कोकट अति उकट त्रकट गति धिनकट,मनडर मट लट लपट मल़े|
जमुना तट प्रगट अमट अट रट जुत,सुर थट खेंखट तेण समें|
घण रव पट फरर फरर पद घुंघर, रंग भर सुंदर श्याम रमें| ३

धम धम अति धमक ठमक पद घुंघर,धम धम क्रम सम होत धरा|
भ्रम भ्रम वत विषम परिश्रम वत भ्रम,खम खम दम अहि विखम खरा|
गम गति अति अगम निगम न लहत गम,नटवत रमझम गम मन में|
घण रव पट फरर फरर पद घुंघर, रंग भर सुंदर श्याम रमें| ४

गत गत पर उगत तुगत नृत प्रिय गत,रम उनमत चित वधत रती|
तत पर ध्रत नचत उचत मुख थै थत,आवृत अत उत भ्रमत अती|
धिधितत गत बजत मृदंग सुर उध्धत,क्रतभ्रत नरतत अतत क्रमें|
घण रव पट फरर फरर पद घुंघर, रंग भर सुंदर श्याम रमें| ५

थन गन तन नचत पवन प्रचलन थन,सुमन गगन धुन मगन सरा|
मन मन वर कृष्ण प्रसन धन तन मन,धन धन वन धन तास धरा|
बिसरे तन भान खान पान विधि ,गान तान जेहि कान गमैं|
घण रव पट फरर फरर पद घुंघर, रंग भर सुंदर श्याम रमें| ६

ढल़ ढल़ रँग प्रगल़ अढल़ जन पर ढल़,झल़ झल़ अनकल़ तेज झरे|
खल़ खल़ भुज चुड चपल अति खल़कत,कान कतोहल़ प्रबल़ करे|
वल़ वल़ गल़ हस्त तुमल़ चित वल़ वल़,जुगल जुगल प्रति रंग जमें|
घण रव पट फरर फरर पद घुंघर, रंग भर सुंदर श्याम रमें|७

सरवस वस मोह दरस सुर थित शशि,अरस परस त्रस चरस अती|
कस कस पट हुलस विलस चित आक्रस,रस बस खुस हस वरस रती|
द्रस नवरस सरस भयो ब्रहमानंद,अनरस मनस तरस अथमें|
घण रव पट फरर फरर पद घुंघर, रंग भर सुंदर श्याम रमें|८

🌸छप्पय🌸
रमत मनोहर रास, सदा सुखवास स्वतंतर|
प्रबल़ गोपजन पास,कमल़ आभास ससीकर|
विहरत करत विनोद,मोद अंतर नहीं मावै|
अरस परस इकतार,दरस नवरस दरसावै|
सुखरुप सदा अशरण सरण,फना करण भव फंद के|
संत साथ सदा खेलत सही, नाथ सो ब्रह्मानंद के||

~~ब्रह्मानंद स्वामी

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