चिरजा – डूंगरराय री

मगरिया मन मोहणा रे! रमै जिथ डूंगरराय।।टेर।।

अड़डड़ घाल चल़ु में उदधि, सुरड़ लियो सोखाय।
सड़डड़ चीर फैंक दिस सूरज, लंबहथ दियो लुकाय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।

हणिया दैत बीसहथ हाथां, ढिगल किया रण ढाय।
भाखरियां बैठी मनभावण, गाथा जग गवराय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।

सातां बैन सवाड़ै सगती, लगती नवलख लाय।
जगती जोत माडधर जोवो, उतरी डूंगर आय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।

विरँगा भाखर, सुरँगा बणिया, विकसी हद वनराय।
निरमल नीर तीर तक नामी, सरवरियो सरराय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।

हड़हड़ नाद हुवो हरदिस में, हम-हम मिल़ी हरसाय।
दे ताल़ी नाचै डाढाल़ी, चिरताल़ी चितचाय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।

गणणण गूंज हुई गिरवर में, सणण घूमी सुरराय।
झणणण झांझ बजै पद झीणी, खणण चूड़ी खणकाय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।

डगमग डोल शेष फण डिगवै,धमक धरा धरराय।
धग-धग हियो कमठ रो धूजै,पड़ै चोट सिर पाय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।

उचरै छंद अणद उर अपणै,वीदग केक वरदाय।
गहरी धुनी राग गायबी गावै,रीझ सुणै जगराय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।

गिरधरदान दासोड़ी गढवी,गुमर कियां जस गाय।
काला आखर व्हाला कर मानै,आवड़ ले अपणाय।।
रमै जिथ डूंगरराय।।

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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