वैश्विक महामारी “कोरोना”

वैश्विक महामारी “कोरोना” से निजात पाने के लिए सभी अपने अपने स्तर से प्रयासरत हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान कर रहे हैं, राजनेता इस चुनौती का सामना करने के अनुरूप नीतियाँ बना रहे हैं, सरकारी कर्मचारी अथक प्रयास करके इन नीतियों को कार्य रूप में परिणित कर रहे हैं, व्यवसायी इस विषम परिस्थिति से जूझ रहे तन्त्र को आपदा राहत कोष में आर्थिक मदद कर रहे हैं, स्वयंसेवी संस्थाएं इस परिस्थिति के मारे अपार जन समुदाय को भोजन एवं रात्रि विश्राम जैसी मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध करने की दिशा में जमीनी स्तर पर कार्य कर रही है, चिकित्सक इस महामारी से संक्रमित मरीजों की चिकित्सा एवं इस संक्रमण के प्रसार को रोकने की दिशा में अथक प्रयास कर रहे हैं, पुलिस एवं सेना के जवान कानून व्यवस्था को बनाये रखने में जी जान से जुटें हैं। जनता के हर वर्ग का व्यक्ति जवान से लेकर वृद्ध तक अपनी कार्य क्षमता के अनुसार अपना  योगदान दे रहा है चाहे वो सरकार द्वारा लगाये गए लॉक-डाउन का पालन करते हुए घर पर ही अपनी प्रतिभा के अनुसार समय का सदुपयोग करना हो जैसे सद-साहित्य पढ़ना एवं बच्चों को पढ़ाना, रचनात्मक कार्य करना जैसे म्यूजिक बनाना, कविता लिखना, आलेख लिखना, साहित्यिक जानकारियों का नियोजन करना इत्यादि।

इसी कड़ी में अनेक विद्वान कवियों एवं साहित्यकारों ने लोगों को जाग्रत करने के लक्ष्य से “कोरोना” महामारी के विषय को लेकर रचनाएँ बनायीं एवं आलेख लिखे जिन्हें एक साथ यहाँ संकलित किया जा रहा है। आगे भी इस विषय से सम्बंधित रचनाएँ इसी आलेख में जुडती रहेगी।


।।सुणजै सुरराय अमीणी साहल़।।

।।गीत-जांगड़ो।।
सुणजै सुरराय अमीणी साहल़,
दया धार दिल देवी।
आयो कोप आपरां ऊपर,
कोरोना सो केवी।।1

चीन चूंथ इटली पण चूंथी,
अबखी में अमरीका।
आयो कटक हिंद रै ऊपर,
तण दंत कीना तीखा।।2

डरगी रैत अबरकै देवी,
मान मनां महामारी।
दूजी नहीं औखधी दीसै,
थिर छाया सिर थारी।।3

कीधा काज अनेकां आगै,
ऐड़ी सुणता आया।
मेटण विपद हमरकै मावड़,
छतराल़ी कर छाया।।4

हिंदवासी समझै नीं हाणी,
राज कयो ज्यूं रेटे।
मूरखता आंरोड़ै मन री,
माता हमकै मेटै।।5

पूरै दिवस फिरै यूं पागल,
हाथां करवा हाणी।
बुधहीणां नै दीजै बुध पण,
कर किरपा किनियाणी।।6

साफ सफाई रखै सदन में,
धुर पल में कर धोवै।
लॉकडावन रै समझ लाभ नु,
जरा बा’र नीं जोवै।।7

दूरी रखै एक दूजै सूं,
भारत रो हित भाल़ै।
निज रो लाभ त्याग नै निरभै,
विपदा रो मुख बाल़ै।।8

आजै भीर आद जिम आई,
भांजण भीड़ भुजाल़ी।
जाहर गीध जगत री जामण
वाहर करै वडाल़ी।।9

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

।।गीत करनीजी नै अरज रो।।

संभल़जै सत सिमरियां साद निज सेवगां,
लेस मत हमरकै जेज लाजै।
विपत्ति मिटावण वसुधा-कुटंब री,
उडंती लोवड़ी भीर आजै।।1

खलक री रखै तूं पलक री खबर नै,
मुलक में पसरगी महामारी।
आपरां तणी तूं हेक छै औषधी,
थापपण छापपण हेक थारी।।2

पसारै दिनोदिन रोग निज पांवला,
प्राथमी ऊपरै दांत पीसै।
जिकण नै काटवा जोरबल़ जामणी
दुनी में अपरबल़ तूंही दीसै।।3

आपरां ऊपरै निजर रख अमी री,
उरां नह खमीरी तजै अंबा।
सत्तापण आपरी सकल़ में सिरोमण,
लल़वल़ां कुंडल़ां पाण लंबा।।4

जारियो हाकड़ो रोग नै जारजै,
ईसरी आप छो अजर जरनी।
तावल़ी आवजै हथाल़ी तीसरी,
काटजै करोना शीघ्र करनी।।5

बुद्धिबल़ बसुधा आपजै बीसहथ,
शुद्धि पण दिराजै जगत सारां।
हूंसपण भरै तूं सेवियां हिये में,
टकर दे रोग नै बाल़ तारां।।6

चिकित्सक उरां में भरै तूं चानणो,
हारपण हिये री जिकां हरणी।
रातदिन हौसलो इणां रो राखजै,
जनां री सेवा में जुट्या जरणी।।7

अगै तैं लखां कज किया नित अमामी,
भोम कर याद नै हुवै भामी।
विधूंसै करोना तणो भय बीसहथ,
जगत नै अबीहो करै जामी।।8

भणै कव गीधियो ताहरै भरोसै,
भरोसो दास नै सदा भारी।
आवजै सताबी भीर तूं अवन री,
मावड़ी संभल़जै अरज म्हारी।।9

~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी


मिनखां रो कोरो ‘ना’ अर परकत रो कोरोना

राजस्थानी में अेक ठावकी कैबत है कै ‘‘हाथ कमाया कामड़ा, किणनैं दीजे दोस/ बाबाजी री पालड़ी, कांदां लीनी खोस’’। इण ‘कोरोना’ री महामारी वाळै कहर रै सामी लाचार अर साहूकार बणेड़ै मानखै नैं देख’र साफ-साफ समझ आवै कै मिनखां जद आपरै मूळ सभाव नैं छोड’र अनीति धार ली तो परकत पसवाड़ो फेरती ओ ‘कोरोना’ वाळो पासो फैंक दियो। जद मिनखां आपरी मांयली चाहत नैं मार’र स्वारथ रो पैंडो करणो सरू कर दियो तो पछै परकत चुप क्यूँ बैठे? आपणा बडेरा कैवता आया है कै ‘‘भाई! जे उत्तर ई देवणो है तो मूंढै रो नहीं, हाथ रो उत्तर देओ’’ मतलब कै कोई आपसूं आस लेय’र आवै अर आप उण काम सारू सक्षम हो तो पछै उणनैं चट्टो उत्तर नीं देवणो चाईजै। सजै जिसो ई सही पण हाथ रो उत्तर देवणो चाईजै पण आज रै मानखै तो कोरी ‘ना’ कैवणी सरू करी तो बा करी कै ‘हाँ’ वाळो खातो ई बन्द कर दियो। मिनखां नैं कोरो ‘ना’ कैवण री इसी आदत पड़ी कै हर ठौड़ कोरी ‘ना’ ई ‘ना’। कोई सूं दो रिपिया उधार ले लियो तो पाछो देवण में कोरो ‘ना’। बूढै मायतां री सेवा करण री बात आई तो कोरो ‘ना’। रिश्तां री पवित्रता निभावण री टेम आई तो कोरो ‘ना’। सद-संस्कारां नैं अपणावण री बात हुई तो कोरो ‘ना’। मुन्ना भाई एमबीबीएस बणण रै चक्कर में इसा आया कै ईमानदारी सूं परीक्षा देवण में ई कोरो ‘ना’। समरथ होवतां थकां ई चंदो-चिट्ठो देवण री वेळा में कोरो ‘ना’। मायतां री बात मानण में कोरो ‘ना’। कोई कैयो कै भाई-भाई भेळा बैठ’र हेत री हथाई करो, उत्तर सागण कोरो ‘ना’। अधिकारां सारू अड़थड़तै मानखै जाणबूझ’र करतब-पथ पर पावंडो धरण री बात पर कोरो ‘ना’ कैवण में आपरो रुतबो मानणो सरू कर दियो। घणी बातां में के पड़्यो है आपां सगळां आप-आपरी बाण छोड़’र स्वारथ रो पल्लो पकड़ लियो अर हर जोगती बात में ई कोरो ‘ना’ कैवणो सरू कर दियो। और तो और आज तो व्यक्तित्व निरमाण री कक्षावां में ई ‘ट्राई टू से नो’ यानी ‘ना कैवणो सीखो’ रा पाठ लागग्या अर इणरो अभ्यास करावणो सरू करीजग्यो। कूवै ई भांग पड़गी। दाई भली न फत्ती। बेजोगती पर तो बजराक ई आवै। छेवट आपणी इण कोरी ‘ना’ री बेजोगती आदत सूं आखती होय आज परकत आपां नैं ओ ‘कोरोना’ बजराक दे दियो। अबै बोबाड़ा मारो। हियै ऊकलै कोनी अर कैयोड़ी कोई रै बाप री ई मानां कोनी। अबै सुधारो कियाँ हुवै। बडेरां रो कैयोड़ो है कै 24 घंटां में एक पल इयांकलो आवै, जिणमें मिनख जकी बात बोलै, बा साची हुवै। आपां मानां या नीं मानां पण आ परकत तो सगळां री आस पूरण वाळा है, इण कारण आपां सगळां रो कोरो ‘ना’ सुण’र अण आपणी चावना पूरी कर दी कै चौबीसूं घंटा ई कोरोना कोरोना बोलता थारी मनगत पूरी करो। खैर! इणनैं आपां परकत कानी सूं सुधरण रो संकेत मानल्यां तो ई अजे कोई आसमान कोनी टूट्यो। अजे ई आपां आपणै मूळ सभाव नैं पकड़ण रा जतन करां, तो सांवरियो हेलो साँभळ लेवै।

‘परकत’ सबद रो सीधो-सीधो अरथ है प्रकृति यानी सभाव या मिजाज। ओ सभाव ई वो मूळ तत्त्व है, जिणरो परिणाम ओ समूचो जीव-जगत है। मोटै अरथ में देखां जद ओ समूचो ब्रह्मांड उणरै दायरै में आवै। आपां इणनैं इयां समझ सकां कै ओ सगळो प्राकृतिक, भौतिक अर पदार्थिक जगत अेकठ में परकत रो ई वाचक है। जद परकत यानी सभाव अर खास कर मानखै रै सभाव री बात करां तो संस्कृत रा ग्रंथां सूं जाणकारी मिलै कै आहार, निद्रा, भय अर मैथुन वाळा कामां-धामां में तो मिनख अर जानवर में कोई फरक है ई कोनी। मिनख नैं मिनख बणावण वाळो तत्त्व तो ‘विवेक’ है, जिणरो जानवरां में अभाव हुवै अर असल में ओ विवेक ई मिनख रो सांतरो सभाव हुवै। इण विवेक रै कारण ई वो करणीय अर अकरणीय रो आंतरो समझै। दया, क्षमा, परोपकार, सहयोग, समन्वय, सहकार, राष्ट्रीयता, मानवता अर विश्वबंधुत्व री भावनावां नैं समझै, स्वीकारै अर अंगीकार करतां आचरण में उतारै। आं गुणां रै कारण री मिनखा-देही नैं ऊपर वाळै री व्हाली कारीगरी मानीजी है। इण मिनखां देही रो सिरजणहार, जद देखै कै मिनख पेट भर्यां पछै पेटी भरण रै जुगाड़ में आपरै करम-धरम नैं ऊंचा टांग दिया तो कितरा दिन सबर करै। छेवट तो अेक दिन ‘सौ सुनार री अर अेक लुहार री’ वाळी बात चरितार्थ होवणी ई ही। अर आ कोरोना बण’र आपणै सामी है।

आपणै लोकजीवण में मिनखां रै काम काज नैं लेय अेक चावी-ठावी ओळी है ‘‘उत्तम खेती, मध्यम बाण/अधम चाकरी, भीख निदाण’’ इणरो अरथ है कै इण संसार में सबसू व्हालो अर श्रेष्ठ काम है खेती करणो। दूजै नंबर रो काम है बाण यानी बिणज-बोपार करणो। तीजै अर अधम दरजै रो काम है नौकरी-चाकरी करणो अर सबसूं गयो-गुजरो काम है भीख मांग’र खावणो। जे सावळसर निजर पसार’र निरपेखी भाव सूं देखां तो किरसाण हुओ भलां बाण (बाणियां यानी बोपारी), नौकरी हुओ भलांई लाचारी, सगळां आप-आपरा महताऊ मारग छोड दिया अर उजड़ चालणो सरू कर दियो। किरसाण जद खेती करतो तो चीड़ी, कमेड़ी, राहू-बटाऊ, बैन-भाणजी, सांड, मंदिर-देवरै सारू आपरी फसल रो अेक हिस्सो राखतो। पण आपां देखां कै कोई मारग चालतै जे मतीरो तोड़’र ई खा लियो तो थाणा-मुकद्दमा होग्या। सरकारी बीमा वाळो रोग इस्यो चाल्यो है कै लोगां री नीत खराब होवण लागगी। घणकरा तो इण जुगाड़ में ई रैवै कै गिरदावळजी कद आवै अर कद काळ घोषित करै का आपणी फसलां रो खराबो लिख देवै। सामां दोय रिपिया देय’र ई जमाबंदी में काळ लिखावण सारू अड़थड़ै। मेह सूं ज्यादा इंतजार फेमन चालण रो करै। खैर!

बाणियां री बहियां में ब्याज री फळावट रो गोरखधंधो कोई सूं छानो कोनी। बाणियां सूं मतलब कोई खास जात री बात कोनी, बिणज बोपार करणियां सगळा इणमें भेळा है। खावण-पीवण री चीजां में गधां री लीद अर ईंट रो पावडर मिलावण जिसी अजोगती आदतां रोजीनां सामी आवै। चोरी-दावै चीजां बेचण रो तो स्यात पट्टो ई छुटायोड़ो है।

जिण नौकरी नैं अधम दरजै रो काम मानीज्यो, आज सगळा उणरै लारै पड़ग्या अर उणमें ई सरकारी नौकरी रै, जिणमें अधिकारां सारू ई सावचेती चाईजै, कर्त्तव्य तो दबाव पड़्यां ई निभावणो हुवै। सगळा सरकारी महकमां में घणां चातरग, घणां गुणवान, बुद्धिमान अर जोगता लोग नौकरी लोगेड़ा हुवै क्यूंकै वै नौकरी में भरती होवण री परीक्षा पास करती वेळा मोकळा लोगां नैं लारै छोड़’र ओ मुकाम हासिल करै पण आपां देखां कै सगळा सरकारी महकमां घाटां में चालै अर दूजी कानीं ई छेत्र रा सगळा निजू उपक्रम अणथाग धन कमावै। कारण आपां नै ठाह ई है। लोग चौड़े-चौगान आ कैवै कै म्हारै ड्यूटी पर जावण री जरूरत कोनी पड़ै, अर इण पर नाज़ करै। हकीकत में तो आ बात ढकणी में नाक डूबो’र मरण वाळी है पण बीगड़ी रा किसा बिनायक हुवै।

चौथो अर सगळां सूं माड़ो काम मानीज्यो-भीख। पण आज मोटै सूं छोटो समूचा इण भीख मांगण री आदत सूं न्यारा कोनी। आदत इसी पड़ी है कै मुफत रो धक्को ई छोडै कोनी। मिनख इण फिराक में लागेड़ो रैवै कै कद मौको मिलै अर कद राज अर समाज सूं कीं माँगूं। बियाँ ओ माँगणो ई हड़पणै जिसो है। जियाँ तियाँ ई मुफ़त रो माल हड़पण री जुगत जारी है। बियां मांगणो अधिकार री श्रेणी में भी आवै पण म्हारी निजर में जे आप पूरी ईमानदारी सूं कर्त्तव्य निभाओ अर पछै मांग करो जणां तो ठीक है, नीं तो वा भीख ई है। खैर!

परकत रो कोई ना तो विरोध कर सकै अर ना ई परकत घणा दिनां ताणी सहण करै। आज परकत इण ‘कोरोना’ रै बहानै ई सही पण आपांनैं आपणै मूळ सभाव सूं जोड़ दिया। जिको चिकित्सा महकमों आपरी लालची अर स्वारथी वृत्ति रै पाण लोगां री निंदा रो पात्र बण्यो आज उणमें साक्षात भगवान रा दरसण हुवै। डाॅक्टर, नर्स अर पूरो पेरामेडिकल स्टाफ जिण ईमानदारी अर जिम्मेदारी सूं आज समाज री सेवा करै, हकीकत में वांरो काम ई इण ढंग सूं सेवा-सुश्रूषा करण रो ई है। परकत हेला दे-दे समझावै। ओजूं अनीति धारण मत करज्यो।

खाखी री बात करां। दुनियां में जितरी गाळियां अर भूडी बातां हुवै, बै सगळी पुलिस वाळां सारू काम में लिरीजगी पण आज खाखी वरदी जमराज सूं सामनो मांड’र मानखै री हिफाजत करती निगै आवै। मिनखां री नफरत रातो-रात खतम हुवै अर खाखी री खिदमत में पुसप-बरखा होवण लागै। सावळसर सोचां तो खाखी रो असली काम इण ढाळै रो ई है। परकत ओ संदेसो देवती समझावै। खाखी री खुद्दारी नैं जगावै अर स्वाभिमान रो पाठ पढ़ावै। किणी पीड़ित री पीड़ा रो निवारण करतां उणरी दुआ लेवण सूं बत्तो धन दुनियां में बण्यो ई कोनी।

बिणज-बोपार वाळो काम ‘लाभ’ कमावण रो काम है अर बडेरां री व्यवस्था करेड़ी ही कै लालच तो करो पण कुलालच मत करो। सागै ई आ भी व्यवस्था ही कै ‘जे नदी में पाणी री मात्रा बधण लाग जावै अर घर में रिपिया मोकळा बधेपो पावै तो पछै सजन मिनख रो काम ओ हुवै कै वो वां दोनां (पाणी अर रिपिया) नैं आपरै दोनूं हाथां सूं बारै काढ़ण रो जतन करै। नाव में पाणी री बोहळायत हुयां नाव डूबै अर घर में अनाप-सनाप धन भेळो हुवै तो वो मिनखपणै नैं ले डूबै, इण कारण दान-पुन्न करणो चाईजै। आपां देखां गाम-गाम में मंदिर, देवरा, धरमसाळावां, प्याऊ, सांडसाळा, मुक्तिधाम आद मोकळा कमठाण दान-पुन्न री बदौलत पूरा हुयोड़ा है। काळ-कसूमै गरीबां अर लाचारां री मदद करण रो काम ई बिणज-बोपार वाळा सेठ-साहूकार करता रैया है। पण भामाशाह वाळी अर सेठां वाळी बात तो इण कोरोना वाळी आपदा रै टेम देखण नैं मिली है। लोग आपरी गाढ़ी मैणत सूं कमायोड़ा करोड़ां-करोड़ रिपिया आपदा सूं लड़ण अर मानखो बचावण सारू दान कर दिया। प्रधानमंत्री अर मुख्यमंत्री राहत कोषां में रिपियां री बाढ़ आयगी। टाबरां तकातक आपरा गुलक तोड़’र सार्वजनिक हित में आपरो योगदान देवणो सरू कर दियो। भिखारियाँ तकातक मानवता सारू आपरी झोळी खाली कर दी। मिनखपणै रो ओ असली रूप है, जको आज सामनै आयो है।

सरकारी अधिकारी अर कर्मचारी आज आपरी पूरी ऊर्जा अर जवाबदेही सूं समाज री सेवामें लागेड़ा है। सरकारी नौकरी चौबीस घंटा री हुवै, इण बात नैं सावळसर समझतां रात-दिन अेक कर राख्या है। टरकाऊ टेक्नोलॉजी में उस्ताद हा, वै ई आज मानवता री सेवा में आपरो पूरो योगदान देवण सारू निकळ पड्या। जका लोग सरकारी नौकरां नैं ‘सफेद हाथी’ कैवता बै आज वांनै जंगी-जोधार बतावण ढूका। सरकारी नौकरी नैं ‘पांगळापाळ’ कैवण वाळां री आज जाड़ा चिपगी। बै ई लोग कैवता सुणीजै कै ‘नौकरी सौरी कोनी’। महामारी सूं सामनो मांडण सारू तैयार कर्मचारियां रै घरां मांय सूं कई घरां सूं आवाजां आवै ‘नौकरी न कीजे प्यारा, दूब खोद खाइए’’। बहरहाल!

छेकड़ली बात भीख वाळी, आज मोकळा लोग इसा है, जका समै री मार झेलतां दो टेम री रोटी रा मोहताज हुयोड़ा है पण इणरै बावजूद लोगां रै मन री संवेदनावां जींवती है। समाज सेवी संस्थावां रा वीडियो देखतां सामी आवै कै जद खावण-पीवण री सामग्री बांटण जावै तो भूखा-तिसा लोग आ कैवता सुणीजै कै म्हारै सूं पैली बां बाबाजी नै देओ, बै बूढा है। बेबस लोग भी लुगायां अर बैन-बेटियां रो पूरो सम्मान करता निगै आवै। रोटियां देख’र झपटता अर टूटता कोनी दीखै। ‘भूखा क्या पाप नहीं करता’ इण कैबत नैं झूठी साबित करतां इण भारत रा लोग संतोष धारण करै। ओ संतोष रो सभाव ई मिनख रो मूळ सभाव है। खैर! आयोडी आफत सूं तो लड़णो अर बचणो ई आज रो जुगधरम है। आपां लड़स्यां अर जीतस्यां।

नहचो राखो। ओ कोरोना अेक दिन मिटणो ई है पण ओ मानखै नैं नीं मिटा सकै। आओ! आपां अेकांत में बैठ’र आपणै मूळ सभाव री खोज करां अर उणरै हिसाब सूं आचरण करां। आप-आपरै काम नैं कोरो ‘ना’ देवण री बजाय जे हाथ रो उत्तर ई देवणो सरू करद्यां तो परकत घणी नाराज नीं हुवैली अर इण भांत री आपदावां नीं आवैली। अस्तु!

~~डाॅ. गजादान चारण ‘शक्तिसुत’



।।सगत बिन बचावै कवण सृष्टी।।

अँब आव जगदम्ब अवलम्ब इक आपरौ,
प्रबळ परताप रौ छत्र पायो।
रोग अणमाप रौ फैलियो रसा पर,
बधै ज्यूँ पाप रौ खेत ब्हायो।।1।।

छूत रौ पूत ओ छावियो छिती पर,
दूत जमराज रौ महा दुष्टी।
जूत कुण जड़ै इण धूत रै सीस पर,
सगत बिन बचावै कवण सृष्टी।।2।।

बांटतो फिरै हर नगर घर वायरस,
छिनक में मिनख पर असर छोड़ै।
सकै कुण समर कर पमर री सगत्ती,
तेमड़ाराय बिन कमर तोड़ै।।3।।

मिलातां हाथ झट गात में मिलै ओ,
घात कर जात जड़ ज़हर घोळै।
नाक मुख ढाँकियाँ बाँध कर न्यातणां,
दहल कर छिप्या नर दिवस धोळै।।4।।

व्याधि विकराळता जाय नहं बरन्नी,
भरन्नी भीत हर एक भाटै।
धूर्तता देख कर धड़क्कै धरन्नी,
करन्नी बिना कुण कष्ट काटै।।5।।

देव दरबार जड़ द्वार सब दौड़िया,
घरां घुस पोढ़िया घण्ट-घोरू।
जाय किम सकै महम्माय जगदम्बिका,
छिती पर बिलखता छोड छोरू।।6।।

आव री आव अरदास सुण अम्बिका,
दुष्ट मद मर्दनी महा देवी।
मुलक सूं कोरोना मिटाबा मावड़ी,
साद कर दास ‘गजराज’ सेवी।।07।।

~~डॉ. गजादान चारण ‘शक्तिसुत’

 

अभी समझन आई, तोहे सबने बताई,
रहो घर में ही भाई, मन घर में रमाइए।
तो पे होत ना टिकाई, नित करत घुमाई,
कहे लल्ला ओ लुगाई, कछु दिन रुक जाइए।
मत करिए षठाई, यामे नेकु ना भलाई,
खाखी करेगी कुटाई, फिर हल्दी लगाइए।
रोग कोरोना कसाई, जाकी फिरी है दुहाई,
जाको शक्तिसुत गाई, आप सुनिए सुनाइए।

~~डॉ. गजादान चारण ‘शक्तिसुत’

 

सगळो जग आफत सू घिरियो,
ओ बखत चुनौती वाळो है।
कोई पण स्हाय करै कोनी,
खुद रो खुद मिनख रुखळो है।

मिनखां री समझो मजबूरी,
घर मांय सबूरी पावैला।
प्रण धारण करल्यो थे पक्को,
ओ प्रण ही प्राण बचावैला।

मरणो पड़सी महामारी नै,
जै आपां प्रण सूं हट्या नहीं।
वै ही वै मरिया है इणसूं,
जो ठौड़-ठिकाणै डट्या नहीं।।

~~डॉ. गजादान चारण ‘शक्तिसुत’




।।करणी खोल किंवाड़।।

कोरोना रै कोप री, जग स्यूं झलै न झाट !
करणा दै किण कारणै ? कीना बंद कपाट !!
छोरूड़ा छट-पट करै, हिवड़े उठै हबौळ!
जग जननी जग कारणै, पाछी खोल पिरौळ!!
वसुधा विपदा वापरी, रुपगी मोटी-राड़ !
माटी मिलसी मानखौ, करणी ! खोल किंवाड़।
लाखूं ‘लाखण’ जावसी, ‘लोवड़-छांव’ लुकाड़ !
कर जोड्यां काबा कहै, करणी ! खोल किंवाड़ !!
परळै दीसै पसरती, चहुं-दिस व्है चिंचाड़ !
उर में उठै अमूंझणी, करणी ! खोल किंवाड़ !!
आफत हुई उतावळी, बैरी करै बिगाड़।
करुणा अब किण स्यूं कवां ? करणी ! खोल किंवाड़ !!
इळ पर कांटौ ऊगियौ, उणने आज उपाड़ !
बीस-हथी, बबरैळ, चढौ, करणी! खोल किंवाड़ !!
शाह तिरातां शंकरी, दीन्ही धैनु दुहाड़ !
उण गत आजै ईसरी, करणी ! खोल किंवाड़ !!
भय स्यूं जग में भगत-जन, चिरजां गावै ‘चाड़’।
डग वैगी भर डोकरी, करणी ! खोल किंवाड़ !!
काळजियो कळझळ करै, अवनी हुवै उजाड़।
‘शक्ति’ सुत री सांभळौ, करणी ! खोल किंवाड़ !

~~शक्तिप्रसन्न बीठू-सींथल (बीकानेर)

।।खुलसी फेर किमाड़।।

मिनख मिनख रै मन में, कोरोणा री काट।
भरण घट में भगवती, कीना बंद कपाट।।१।।
सगती हर मन संचरै, आई री आ औळ।
कण कण पसरी करनला, पाछी खुलसी पौळ।।२।।
धरती बधगी धड़कणां, रज में पसरी राड़।
मिनख जीतसी मुलक रौ, खुलसी फेर किमाड़।।३।।
जन मन बैठ जगदंब, लोवड़ ओट लुकाड़।
काबा व्हाला करनला, खुलसी फेर किमाड़।।४।।
परळे मांय पधारिया, अवनी री बण आड़।
कोरोणा पर काळ बण, खुलसी फेर किमाड़।।५।।
इळ री मेटण आपदा, बेरी रौ कर बिगाड़।।
करणी करसी करनला, खुलसी फेर किमाड़।।६।।
करणी कांटौ काढसी, अवनी देय ऊपाड़।
सिंघ भाव कर संचरण, खुलसी फेर किमाड़।।७।।
सहाय करै मां शंकरी, दिल में भरै दहाड़।
जीव जीव रा जतन कर, खुलसी फेर किमाड़।।८।।
भय री दुसमी भगवती, देवियांण दहाड़।
दुनियां रै डग डोकरी, खुलसी फेर किमाड़।।९।।
काळजिया में कौड कर, अवनी मेट उजाड़।।
भाई शक्ति भाव भर, खुलसी फेर किमाड़।।१०।।
जग जननी जगदंब रै, चराचर री चींचाड़।
मेट मुलक री मांदगी, खुलसी फेर किमाड़।।११।।

~~डॉ. राजेंद्र बारहट-खारी छोटी (जोधपुर)



।।कट जासी दुख रोग कोरोना।।

कट जासी दुख रोग कोरोना।
विपदा मिट जासी चंहु कोना।।

घर मे रहजो बैठा भीतर।
पुलिस पटकसी डंडा नीतर।
साफ सुथरा रखे बिछोना।
रगड रगड कर हाथ धोना।
सरकारी अस्पताल सुरक्षित,
टाळ व्यर्थ रा जादू टोना।
आइसोलेशन हे अति आवश्यक,
कुछ दिन बैठो छोना मोंना।
कट जासी दुख रोग कोरोना।
विपदा मिट जासी चंहु कोना।।

दो मीटर तक रखणी दूरी।
चाहे हो कितरी मजबूरी।
अळगा सूं करणो अभिवादन,
जतन देह रो घणो जरुरी।
अक्कड छोड पुराणी आदत,
मूंडे राम बगल मे छूरी।
परमेसर रघुवर जग पालग,
सांचे मन सूं, ध्यान धरोना।
कट जासी दुख रोग कोरोना।।

विपदा मिट जासी चंहुकोना।
मोदी जी रो कहणो मांनो।
कूडी भाखै नी इक आंनो।
सी ऐम अपणो बडो सजग है।
गजेंदर समंदर गुण वानो।
संकट मे विध विध समझावै,
सगळा मिल जुळ काम करोना।
कट जासी दुख रोग कोरोना।
विपदा मिटजासी चंहुकोना।।

आ उम्मीद है सोले आंना।
कट जासी दुखः रोग कोरोना।।

~~मोहन सिह जी रतनू, से.नि. आर.पी.एस. जोधपुर

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