दीकरा – गज़ल

🌺दीकरा – गज़ल🌺

AutherGirdhardanRatnuगिरधरदान रतनू “दासोड़ी”
तूं तो ग्यो परदेस दीकरा।
सूनो करग्यो नेस दीकरा।।
कदै आय पाती विलमाती।
अब बदल़्यो परिवेस दीकरा।।
याद उडीकां बूढी थयगी।
चावल़ हुयग्या केस दीकरा।।
प्रीत पाड़ोसण तोड़ रूठगी।
नीत खूटगी देस दीकरा।।
काके खेत!बडै घर खोस्यो।
भूवा कीनो केस दीकरा।।
गूदड़ राल़ी कदरा बिकिया।
बचियो ओढण खेस दीकरा।।
बासी -बूसी मांग खावणो।
स्वाद मूंडै नीं लेस दीकरा।।
पीपल़ गट्टै उठणो -सोणो।
बणगी म्है दरवेस दीकरा।।
सगल़ो गांम कहै दुखियारण।
लागै दुखती ठेस दीकरा।।
सुपनै में पगला तूं चांपै।
हंस जागूं हरमेस दीकरा।।
थारै कोड, मोतरै गोडै।
बैठी देनै रेस दीकरा।।
बगत मिल़ै तो मुट्ठी लकड़ी।
देवण आजै देस दीकरा।।
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AutherNarpatAsiaनरपत आसिया “वैतालिक”
गया ठामडा भाज दीकरा!
रांधूं कीकर आज दीकरा!
छाछ मांगनै करूं राबड़ी
नहीं घरां पण नाज दीकरा!
बापू थारौ पी परवार्यो,
करै न कांई काज दीकरा!
फटिया गाबा बण्या दुसासन,
छतै किसन गी लाज दीकरा!
लावा सो तन लूंटण;लांठा,
बैठा बारै बाज दीकरा!
चूवै टापरौ इण बिरखा में,
गरजै अंबर गाज दीकरा!
खेतर सारां रख्यां अडाणां,
खाद बीज रे काज दीकरा!
रूस्या ठाकर अर ठाकुरजी,
किणनें दूं आवाज दीकरा!
दुख झेलूं अर काढूं दाडा,
हांकू जूंण जहाज दीकरा!
“पुत लाडलौ” – “गल़ै वाडलो, ”
“करै हियै थूं राज दीकरा!”
थांसूं म्हानै आस घणेरी,
रखै करै नाराज दीकरां!
माणक, हीरा, लाल मढ्यौडो,
तूं नरपत रो ताज दीकरा!
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