देखो – गजल

sattasukhबातां ज्यांरी स्याणी देखो।
भरी धूर्तता वाणी देखो!!
दूजां दुख में होय दूबल़ा।
कैवै काग कहाणी देखो!!
जनता नैं तो कोई खूंटलै।
समझ गाडरी लाणी देखो!!
ठग्गां घर नीं रीत दैण री।
वुस्त बठै तो जाणी देखो!!
उण जागा मत पाल़ भरम नैं।
आंख्यां मरग्यो पाणी देखो!!
बांनै कोई की विलमासी।
राख मुलक री छाणी देखो!!
सुख-दुख बांटण जोर जचाई।
फरजी मार्ग ढाणी देखो!!
दीन-हीन रो रगत पीयग्या।
समझ घाट रो पाणी देखो!!
नवै राज रा नवा कायदा।
जनता नैं बूंबाणी देखो!!
फिर र्यो जन तो लोकतंत्र में।
बल़ध आंधो ज्यूं घाणी देखो!!
सिरक सत्ता बंगलां में बड़गी।
समझणियां ई माणी देखो!!
आजादी नैं पकड़ गादड़ां
पोलपटी में ताणी देखो!!
बुगला पीवै दूध खीर तट।
पांती हंसलां पाणी देखो!!
खरी कमाई दोरी हुयगी।
भ्रष्टाचार हेमाणी देखो!!
~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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