देशनोक-दर्शन – भलदान जी चारण

।।छप्पय।।
पोखर मथुरापुरी, सेत बंधण रामेसर।
कर बदरी केदार, अधिक आबू अचलेसर।
पापां गमण प्रयाग, गया गंगा गोमती।
मुकतिदेण सुरमात, सकल महिमा सुरसत्ती।
कुरूक्षेत्र नाथ कासी सकल,
जात घणा जुग जीविया।
करनला आप दरसण कियां,
कवि केता तीरथ किया।।

परसे आज प्रयाग, आज गंगा मझ न्हायो।
आज द्वारका उदित, आज जटधरपुर आयो।
निज दरसण जगनाथ, पुरी केदार पिछाणी।
बदरी आज बिसेस, इऴा तीरथ सह आणी।
मेल्हतां पांव ओरण मही,
भया सुकारज भल्ल रा।
धिन आज दिहाङो देह धिन,
किया दरस करनल्ल रा।।

मन्दिर मांटी तणो, आप निज हाथ उपायो।
करा मात आकरी, दूनी उपर दरसायो।
सीस छत्र सोहणों रिधु किनियांणी राजे।
सात बहनां सिरताज, बीच आवङा बिराजे।
सद बिरद लीध मेहा सदू ,
भाग उदित भया भल्ल रा।
आज रो अरक ऊगो अछौ,
किया दरस करनल्ल रा।।

~~भलदान जी चारण
प्रेषित: राजेंद्र जी कविया (संतोषपुरा – सीकर)

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