धरंत ध्यान आपको – गिरधारी दान रामपुरिया

।।छंद नाराच।।
धरंत ध्यान आपको, अणंद भाव आवतो।
नमंत नाम नेम सूं, जपंत रोग जावतो।।
करंत याद कीरती, मिटंत दोस मावड़ी।
करो सहाय आप आय, धाय बेल धावड़ी।।

अनंत दृष्टी आप री, अथाह लोक में अही।
जनंत लोक जामणी, मेहा तणी अयी मही।
तुरंत काळ टाळणी, न लेस अंग लावणी।
रखो ज लाज रंक री, विराट नूं वधावणी।।

अथाह चाह माह राह, प्रीत पांण पोखियो।
रखी ज लाज मान काज, सिंधु मात सोखियो।।
अडिग डोल रीस चिग्ग, सुम्मरो सहारणी।
आवो ज मात बीस हाथ, पात नाव पारणी।।

रखंत आद रीत रोज, मौज राज मंडिया,
हणंत हेक हेक दांण, चंड मंड खंडिया।।
विधंस अंस मेट दंस, रैण वंस राखणी।
करो कृपा ज मात आज, छाक दाख चाखणी।।

नमो ज सीस आप ईस, कीस माथ कोंपिया।
रिखी मुनी ज देव सेव, चाप तुझ्झ चोंपिया।।
भगंत भूत यंम दूत, पूत हित्त पावणी।
खरी ज मात झट आत,  बाय रूप बावनी।।

~~गिरधारी दान रामपुरिया

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