दुहा सोरठा गीत री

🌺दुहा सोरठा गीत री🌺

कदे शबद रा फूलडां, कदै भाव नाळेर।
धरतौ हुं मारै धकै, जैडी म्हौ मन लेर॥1
आखौ हुं अरपूं कदै, कदै वधेरुं फोड।
हरपळ मां स्वीकारती, करै घणौ मन कोड॥2

पांच सात इगयार कर , भेळा घण नाळेर।
लीलौ तोरण मढ धकै, अरपूं मां ने फेर॥3
लच पच घी री लापसी, सानी तल री साथ।
जीमै माता जतनकर, नवलख री जो नाथ॥4
पांणी पण जो दूं चढा, मन सूं मदिरा मान।
करती म्हारी मावडी, सदा भाव सम्मान॥5

डिंगळ री डणकार मैं, रमती नवलख रास।
दारु पीय’र डोलती, हर पळ बारै मास॥6
करणी री छबि धर लगै, डिंगळ रो दरबार।
हरपळ माता डोलती, पी कविता मद धार॥7

सरस शबद रा फूलडा, महुडां मन सूं मान।
काढै है कादंबरी, नित प्रत नरपतदान॥8
प्हैली मांनै अरपतौ, पछै कवेसर आप।
कविता री कादंबरी, पीवौ सब अणमाप॥9
कविता री कादंबरी, दाडम अर मय दाख।
डिंगळ री डणकार है, चाख सकै तौ चाख॥10
दूहा सोरठा गीत री, बोतल चढै अमाप।
डिंगळ री डणकार मैं, धणियां पीवौ धाप॥11

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