दसमहाविधामयी मेहाई वंदना

( मेहाई सतसई – अनुक्रमणिका )

IMG-20150104-WA0009धारी सिर जिण धाबळी, कंकण वळे करां ज।
झणण पद शुभ झांझरां, मेहाई महराज।।६८५
माळा फेरत मावडी, मढ बैठ’र रिधुराज।
रात दिवस हिरदै बसो, मेहाई महराज।।६८६
सिंदुर चरचित भाळ शुभ, हेम हार गळ राज।
मालक मां देशांणमढ, मेहाई महराज।।६८७
काळी प्हैरी कांचळी, बिछिया पग रिधु राज।
कर त्रिशूळ किनियांण रे, मेहाई महराज।।६८८
आवड नाम अवाज री, गूंजै अंबर गाज।
माळा फेरै मावडी, मेहाई महराज।।६८९
छिण में व्है थूं डोकरी, छिण में बाळक राज।
विध विध वपु धारी नमन, मेहाई महराज।।६९०
कृपा करे किनियांण जद, संभव सबकुछ राज।
अधिराजन अधिराज है, मेहाई महराज।।६९१
काळी नरमुँड मालिनी, किरमाळां कर साज।
डाढाळी विकराळ वपु, मेहाई महराज।।६९२
घोर रूप घन गरजणी, सवारूढ वरदा ज।
काळी किनियांणी स्वयं, मेहाई महराज।।६९३
पीतवसनधारी परम, खींचै रसन खलां ज।
बाई खुद बगलामुखी, मेहाई महराज।।६९४
ब्रह्म अस्त्र धर हेक कर, दूजै करां गदा ज।
बगला दसविध्यामयी, मेहाई महराज।।६९५
नेह निहाळक नयण त्रय, पाश धनुस कर साज।
स्वयं मात खुद सोडसी, मेहाई महराज।।६९६
ऐश्वर्या कमलासना, विहरण सिंधु सुधा ज।
संकटहारी सोडसी, मेहाई महराज।।६९७
धवलांबर वपु धारिणी, हाथ सूपडो राज।
धूमावत खुद धावडी, मेहाई महराज।।६९८
भूखी जुग जुग, पलभखा, वायस जुत रथ राज।
पिप्पलाद पूजित परम, मेहाई महराज।।६९९
सूरकोटिसममुखप्रभा, मुंडमाळ गळ मांझ।
भयहारी जय भैरवी, मेहाई महराज।।७००
पुस्तकमालापाशधर, अंकुश कर शुभ साज।
ब्रह्मा पूजित भैरवी, मेहाई महराज।।७०१
रतवीणावादन रिधू, चेतनसागर राज।
विहरण मातंगी वदां, मेहाई महराज।।७०२
मातंगी मुनि-ईश्वरी, ब्रह्मासनी बिराज।
परमा परमेशी स्वयं, मेहाई महराज।।७०३
रगतकमलदलराजिनी, ससिमुकुटासिर साज।
भुवनेशी मां थूं स्वयं, मेहाई महराज।।७०४
सुरनरमुनिजनसेविता, मुखपर सूर प्रभा ज।
भुवनेशी भय भंजणी, मेहाई महराज।।७०५
कमलाभा! करकमल दुय, हाथ-अभयवर ज्यां ज।
लिछमी लोवडवाळ खुद, मेहाई महराज।।७०६
करे सूंढ अभिसेक करि, कनक कांति मुख राज।
मुकुटा लिछमी मां स्वयं, मेहाई महराज।।७०७
प्रेतासन हरसंकटा, कटियौडो सिर राज।
छिन्नमस्तिका मां स्वयं, मेहाई महराज।।७०८
सदभगतां सुख समपणी, खुद कटियौ सिर ज्यां ज।
छिन्नमस्तिका है स्वयं, मेहाई महराज।।७०९
उग्र सुभावा, इकजटा, दुर्वादल आभा ज।
तारा खुद तूं ही स्वयं, मेहाई महराज।।७१०
कातर -खडग कपालिनी, नीलकमल कर ज्यां ज।
मुँडमाली तारा स्वयं, मेहाई महराज।।७११
मुख मँह मातंगी बसै, तारा चख बिच राज।
काळी उर तव नित रमै, मेहाई महराज।।७१२
धूमावत धवलांबरा, कट-मथ है कटि मांझ।
भृकुटि बसै तव भैरवी, मेहाई महराज।।७१३
वक्ष इन्दिरा खुद बसै, पद मँह बगला राज।
दसविध रूपी डोकरी, मेहाई महराज।।७१४
सतसई ह्वैगी सहज में, सहस बणावै वा ज।
है वपु आवड हिंगुला, मेहाई महराज।।७१५
नरपत मन तिरपत नहीं, कोटि कवित कथतां ज।
होय हजारा पण सकै, मेहाई महराज।।७१६
कविता माता री कथी, सरस बणी शुभराज।
रीझौ मां राजेश्वरी, मेहाई महराज।।७१७
आखर माळा पोयली, करणी थारे काज।
सादर मां स्वीकारजो, मेहाई महराज।।७१८
बाळ समझ मौ बगसजै, करणी नहँ कविराज।
दोस दूर कर बांचजे, मेहाई महराज।।७१९
सप्तशती दोहामयी, रचवाई रिधु राज।
म्हौ पर कीधी महर घण, मेहाई महराज।।७२०

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *