ऐ है भारत रा भावी कर्णधार!

इण दिनां होय रैयै अंतर्राष्ट्रीय खेलां म़े भारत रै पुरष खिलाड़ियां रै प्रदर्शन नै लेय कई कवि मित्रां आपरी काव्यात्मक टिप्पणियां की। इणी कड़ी में कीं ओल़्यां आपरी निजर कर रैयो हूं पण खाली खिलाड़ियां नैं इंगित नीं कर र ऐड़ी समूली मानसिकता रै माथै-
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ऐ है भारत रा भावी कर्णधार!
उठणै री आंरी पौच नहीं, माथै लैणै रो भार!!

आंख्यां में आंरै गीड झरै,
सैफड़ रा बैवै परनाल़ा।
उठतां री पींड्यां धूजै है,
आंख्यां रै आडा तिरमाल़ा।
गल्योड़ा गोडा आंरा है,
छल्योड़ा देखो जोबन रा।
आदत रा खल्योड़ा पूरा,
डूब्योड़ा डेरा तन रा।
खूस्योड़ै गैरै सा दीसै है,
चालै है राम भरोसै।
तोटै है देख जवानी आंरी,
दोय बूढापा दीसै।
गुड़सी तो गाडी कितरा दिन,
पड़सी तो कीकर पार!
ऐ है भारत रा भावी कर्णधार।।

पढणै रो आंरै नाम नहीं,
मरजादा पाल़ण नेम नहीं।
आल़स रा मोटा ठाम देख,
मेहनत सूं आंनै प्रेम नहीं।
जीणै री ज्यांरी हूंस नहीं,
ओलिदर माडै पड़िया है।
आवै है देख अचूंभो ओ,
कीकर ऐ विधना घड़िया है।
कीकर ऐ लड़सी रणआंगण,
मिनड़ी रै डोल़ां डर ज्यावै।
तोपां रा सुणै हबीड़ा तो,
माचां में सूता मर ज्यावै।
ऐ घर बैठा ई गारत हो जासी,
क्यूं लेसी भारथ रो भार।
ऐ है भारत रा भावी कर्णधार।।

रब़ड़ रा हांचल पी पल़िया,
साव दूध रो की जाणै!
चूकाणो पड़सी मोल कियां,
आ बात बापड़ा क्यूं जाणै।
पांख्यां सूं बाहर आतां ही,
आंख्यां सूं अल़गा कर दीना।
घर री तो सीखी एक नहीं,
लखण तो लाखां रा लीना।
चोखी तो सीखी एक नहीं,
माड़ी रा कारीगर मोटा।
छोलै है छोडा छाती रा,
बोलण में बोली रा खोटा।
आंनै ईमान सूं काम नहीं,
है चोरी में हुसियार।
ऐ है भारत रा भावी कर्णधार।।

मोटा है देख नसेड़ी ऐ,
कीचड़ में काठा कल़ियोड़ा।
दाल़द सूं आंरा पूर भर्या,
जीता ही लागै मरियोड़ा।
बातां रा लाठा काढै है,
घातां सूं काठा भरियोड़ा।
आगै री सोचै एक नहीं,
भुगतै है पोचा करियोड़ा।
आयो सो छायां आ़ंरी में,
ऐ आप सरीखो कर देसी।
ल़ोकतंत्र रो राम रुखाल़ो,
ऐ काम आपरो कर देसी।
आजादी कितरा दिन रैसी?
जावण रा कर दीधा कार।
ऐ है भारत भावी कर्णधार।।

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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