फोग रो छंद

अड़ड़ाटां दे आंधियां, गड़ड़ाटां नभ गाज।
ऊभो मरूधर मे अडर, अडग फोग तूं आज।।

छंद – नाराच
फबै थल़ी ज फोग तूं फल़ै ज फूठरो फबै,
महक्क धोरियां मुदै सजै ज मोहणो सबै।
थल़ी ज थाट तूंज सूं रल़ीज पूरणो रसा,
अपै ज रूप ओयणां जुड़ैज होड ना जसा।।१

मुदै ज मात भोम सूं सप्रीत रीत तो सिरै,
दखांज भोम दूसरी धिनो ज ध्यान ना धरै।
बहैज एक वाट ही मरू रूपाल़ तूं मँडै,
मनां तनां थल़ू मही ज तूं छटांक ना छँडै।।२

कराल़ काल़ मे कितांक वीर ढाल तूं बणै,
रुखाल़ घोन रिड्ढ री तदै ज भाल़ तूं तणै।
चहै हमेस चाव सूंज तोड तीखली तदै,
रुड़ाज ऊंठ रूप रा जणै ज जोड रा जदै।।३

जटा बिखेर जोगधार तापसी जिमां तपै,
उभो अथग्ग एक पग्ग जाप नाम रो जपै।
सहै ज ताप ऊ सँताप आप और सूं अगै,
धिनो ज धीर धार वीर डाक हेक ना डिगै।।४

दहै दपट्ट लू लपट्ट भट्ट वट्ट भाल़णो,
धरा सपट्ट व्है धपट्ट झट्ट जोर झालणो।
छँडै न हट्ट ऊभ छट्ट रट्ट एक मे रहै,
मुदै मरट्ट मे इमट्ट सो सँकट्ट तूं सहै।।५

अँधार घोर आंधियां चकार चोर ज्यूं चलै,
मरू प्रसार सो मुदार हेर सार ले हलै।
अड़ेल तूं अड़ै उबेल खेल वाव सूं खसै,
विकट्ट साव वार मे बडाल़ चाव सूं बसै।।६

उडंत धूड़ वा अड़ूड़ झाड़ झूड़ झाड़ती,
सजै किसान सूड़ काज बांठका उपाड़ती।
कड़ीड़ दंत क्रोध मे भडीड़ खेजड़ी भँजै,
अबीह भीड़ मे अठै उगाड़ छातियां अजै।।७
(छंदां री छौल़ सूं)

~~गिरधर दान रतनू “दासोडी”

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