गीत भाटी तेजमालजी रांमसिंहोत रो

इमां अथग आतंक रो घालियो अवन पर,
चहुवल़ घोर अनियाव चीलो।
बहंता जातरु घरां में बाल़ पण,
हियै सुण बीहता नांम हीलो।।1

असुर उण हीलियै बीहाया अनेकां,
कितां नै लूंटिया सीस कूटै।
घणां रा खोसनै मार पण गीगला,
लखां नै उजाड़्या लियै लूंटै।।2

पंथियां सतातो राह में पापियो,
गरीबां मारतो जवन घाती।
हील रै नांम सूं दिसा हर हेक में,
जांणजो धूजती सरब जाती।।3

माड़ रा पात दो दुई मुरधर तणा,
रतनु नै वरसड़ा वाट राजी।
बहंता आपरै घरां दिस विलमता,
पमंग चढ घेरिया आय पाजी।।4

माल सब छीन नै मार पण नांखिया,
ईहग धर बापड़ा अर्ध चेतै।
मोत सूं जूंझता माग पण हेरता,
आवियो पथिक इक वाट ऐतै।।5

पथिक नै संदेशो पठायो पुकारां,
चारण रतनू नै गोत चींचा।
हीलियै निखूना घेरनै हेतवां,
काढिया अमां रा तुरक कींचा।।6

तेज रांमेण रो तपै तपधारियो,
माड में एक माड़ेच मांटी।
उवै नै जाय नै कहीजै ऐहड़ी,
वीदगां मरंता विपद वांटी।।7

संदेशो पातवां तणो सतधारियै,
तेज नै दियो खड़ तुरंग तातै।
भंवारां तणी नै तणी पण भ्रगुटी,
रोस सूं अंखियां हुई रातै।।8

मरण रो सोच नह कियो तिल मात ही,
लेस पण बीह नह रिदै लायो।
उग्राहण वैर नै चितारी ऊंडपण,
अंग में उफणतो जोस आयो।।9

जीण कस पमंग री लेय झटसारियां,
मरण मनधारियां बुवो मांटी।
परापर प्रीत नै प्राथमी पोखवा,
अरी रै जाय दी घरै आंटी।।10

हेक ही घाव सूं मारियो हीलियो,
सीस पण काट नै लियो साथै।
सूंपियो ईहगां आयनै सूरमै,
हेत सूं अमर आ भेंट हाथै।।11

वाह रै तेज रांमेण रा वीरवर,
भोम पर वाह नित कोम भाटी।
वाल़ियो वैर तैं रतनुवां वडमपण,
खरै पण कीरती खाग खाटी।।12

धिनोधिन क्रमेती हुई उ धरण पर,
जांमणी तूझ सो पूत जायो।
जगत में दिखाई वीरता जेहड़ी,
ऐहड़ी गलां सुण अंजस आयो।।13

चाढियो सूरमै नीर पख च्यार ही,
रीत रजवाट री गुमर राखी।
सनातन प्रीत रो प्रागवड़ सूकतो,
सींचियो हेत रै सुजल़ साखी।।14

रंग रजपूत तो तेज रांमेण रा,
जगत में रंग तो जबर जाती।
गीधियो कहै कव निभायो घरूपो,
वीरता दीपसी अमर बाती।।15

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

सन्दर्भ प्रसंग (लिंक को क्लिक करें): पंथी एक संदेसड़ो तेजल नैं कहियाह

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