गज़ल – जींदगी रा गीत री

जींदगी रा गीत री पंक्ति घणी है।
वां सबां में आध इक म्है गणगणी है।
आज भाल़ी बाट तो औ ठा पडी के,
जिंदगाणी थां बिना लंबी घणी है।।
बे विपद रा भाखरां ने काट देवै,
हाथ जिण रे धैर्य री हीराकणी है।।
पावतां ही परस निरमल डील होवै,
प्रेम अर प्रियतम उभय पारस मणी है।।
कुण सुणैला सोच मन औ म्हूं न बोलूं।
हां इयां तो म्हां कनें गज़लां घणी है।।
ठाकरां ठरकौ न राखौ ठाठ रो थें,
साह्यबी रो कोई कायम नीं धणी है।
चोपडी सब फाड दीधी म्है गज़ल री,
जद सूं थारी आँख री पोथी भणी है।।
सरकती सरपट सदा मन बांसवन में,
कल्पना है वा के !काल़ी नागणी है।।
टाप घोडां री बजै मन खानवा में,
तोप बाबर री वल़ै कद धणधणी है।

जागतां सूतां सदा “नरपत” डरै है,
याद री बंदूक मन उपर तणी है।।

~~©वैतालिक

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