गजल – थे भी कोई बात करो जी – जी.डी.बारहठ (रामपुरिया)

थे भी कोई बात करो जी,
भैरू जी नै जात करो जी।
अपणो बेटो पावण सारूं,
दूजो सिर सौगात करो जी।।

जनम दियो सो जर जर होया,
पीळा पत्ता झड़ जासी,
सुध-बुध वांरी मती सांभळो,
मंदिर में खैरात करो जी।।

आपाधापी-मारामारी,
आज मुलक में आम हुई,
सखरा दिन लावण रै खातिर,
हमें सही हालात करो जी।।

लिखिया लेख भला कुण पढिया,
पंडत-जोतख कूड़ी बात।
भाग भुजावां रै बळ बदळै,
मैणत दिन अर रात करो जी।।

आज चुणावां री इण चौसर,
वोट कये नै देवां बोल।
चोर चोर मोसेरा भाई,
कूड़ी भलां कनात करो जी।।

मंदिर-मस्जिद में नी मिळिया,
काशी-मथुरा में भी केथ।
माईतां नै तीरथ मांनो,
पगां निंवण परभात करो जी।।

आफत री आंधी सूं अड़िया,
लड़िया-भिड़िया नही लुळ्या।
“गिरधर” उण वीरां गुण गातां,
खरै मिनख री ख्यात करो जी।।

~~जी.डी.बारहठ (रामपुरिया)
वरिष्ठ अध्यापक (विज्ञान)
रा.आ.उ.मा.वि.-उजलां

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