गीत घोड़ी री तारीफ रो – महादानजी महडू

उदयपुर महाराणा भीम सिंह जद उपहार सरुप घोड़ी महादानजी महडू नें दी तद कहियोडो गीत।

।।दोहो।।

बीज ससी सोहे बदन, म्रिग सरसी गरमंड।
जका भोज बूंल़ी जसी, आपी असी उडंड।।1।।
उर चौड़ी दोड़ी उड़ै, डिगोड़ी मृग डाण।
गज मौड़ी तोड़ी गढां, दी घोड़ी दीवाण।।2।।

।।गीत सपाखरु।।
दिनां थोड़ी चौड़ी उरां घोड़ी वेग बधै दौड़ी,
तोड़ी फेट लागां गढां कोड़ी मोल तेण।
मोटोड़ी चसम्मा साळग्राम जेड़ी गजां मोड़ी,
भाणवा आछोड़ी घोड़ी बरीसी भीमेण।।1।।

ठेलणी अरिंदां छंदां प्रलंबा हालणी ठेका,
पोहां जाय न लेणो छलेणी पूर पाण।
कछेरी मलेणी म्रिगा तुजीहा घलेणी कंधा,
दीधी झाप लेणी पाता बलेणी दीवाण।।2।।

जावै कोट उलंगी तरंगी ताछ गंगी जळां,
बेतंगी भीडंगी लाहा भरे संगी बाव।
रीझंगी उमंगी देव अंगी आप रंगी राणै,
पगों काज कीधी चंगी पमंगी पसाव।।3।।

देह री विसाला रुप रसाला दुसाला दिना,
चालां सुखपाला उरां ढालां कंध चाप।
कोयणा गुलाल वाळा वाहरे देवाळ काला,
आला ताला करंती विलाला ब्रवी आप।।4।।

मोडाणां तछेरी बिना पछेरी उडाण मागा,
तलफ्फां मछेरी जत्रा रछेरी तैयार।
गजेन्द्रां गछेरी लीधी खरीदै लछेरी गजां,
अछेरी कछेरी दीधी बछेरी आचार।।5।।

नच्चै थाळां ऊपरां संगीत ताळां नृत्तकारी,
आलमाजिहाना धावां बदंती अमाप।
उडंडाणी आव जावां खरीती फिरती आछी,
झालिया परीती चीती लीधी जाणै झांप।।6।।

लंबी धूनां नागणी प्रलंबी आळ लटांवाळी,
ऊपनी असल्ली खेत घटावाळी ऐम।
इसो ऊठ लागां रान उडै झटापटावाळी,
ताळी पीठ वागां नार नटांवाळी जेम।।7।।

भीडंगी रुपगां रीझे आयजादी दीधी भूरै,
पंगी चायजादी प्रथीरीधो सिंधूपाज।
लगां आभूखणां तायजादी खोल बारै लीधी,
सायजादी लडांलूंम कीधा साजबाज।।8।।

माती पूर ताती ससी दोज री सारखी मुखां,
असी भूप धारै न को चोज री अबार।
बापो भीम पाबू री काळमी भोज री सीबूंळी,
समापी मौज री घोड़ी फौज री सिंगार।।9।।

~~महादानजी महडू

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