🌺घूंघर छम छम छम छम बाजै🌺

MataSaraswati

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घूंघर छम छम छम छम बाजै!
रसन पटांगण रमै चारणी, सबद बीण कर साजै!

उजळआनन, हार अनुपम, स्फटिक धवल सुभधारी!
आई नाचै रसन अखाडै, वसन स्वेत वरदा री!
घम घम घम घम पद रव गूंजै, जाणक घन नभ गाजै!
घूंघर छम छम छम छम बाजै!
रसन पटांगण रमै चारणी, सबद बीण कर साजै!

नवलख तारा जांण निरंतर, नवलख निरखणहारा!
धार नवलखा रमें नवेलख, सज सोळह सिणगारां!
धवल नवल शुभ कमल धारणी, नवलख बीच बिराजै!
घूंघर छम छम छम छम बाजै!
रसन पटांगण रमै चारणी, सबद बीण कर साजै!

डम डम डम डम डाक बजंती, झणण बीण झंकारां!
खणणण खणणण बजै खंजरी, सणणण बजै सितारां!
तिरकिट तुम तत, धिधिकट धुम धत, चंग मृदंगम बाजै!
घूंघर छम छम छम छम बाजै!
रसन पटांगण रमै चारणी, सबद बीण कर साजै!

कविता-केसर, सुर-सिंदूरम, लय छंदां री लाली!
गजल गीत कुम कुम नभ बरसत नाचत आभ कपाळी!
अनहद उडत अबीर गुलालां, निरखण नरपत जाजै!
घूंघर छम छम छम छम बाजै!
रसन पटांगण रमै चारणी सबद बीण कर साजै!!!

~~©वैतालिक

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