गीत – जांगड़ो चंदू माऊ नै अरज

।।गीत  – जांगड़ो।।
मो मन रो सोच मेटजै माता, दादी आगल दाखूं।
हूं तो एक एकेलो हरदम, लारै जुलमी लाखूं।।१

आखूं कथ म्हारी किण आगै, तन लेवै सह टाल़ी।
साच धणी ऊदाई साभल़, पख पूगै झट पाल़ी।।२

सिरकै सिला तूझ सूं सांप्रत, मिटसी गिला मिहारी
दूजां विश्वास करूं न दिल में, थिर आसा इक थारी।।३

विपत घणी हुवो मन व्याकुल, दुख नै किण ढिग दाखूं।
है आ शरम तिहारै हाथां, राज भरोसो राखूं।।४

आल़स मती लावजै अँग में, आजै अबै उँताल़ी।
दादी गीध कहै आ दिल री, तुरत सँकट नै टाल़ी।।५

थूं चंदू बूढापै थकसी, याद कियां नह आसी।
म्हारी लाज मीठकी माऊ, जोतां थारै जासी।।६

~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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