गीत सुपंखरो

इच्छा बैराट उपाय जै नमस्ते नमो आदेश्वरी,
समस्ते रचाया रूप अनेका सनाद।
गणपति शारदा ब्रह्मा विष्णु रुद्र गाया,
अम्बे महमाया जयो शकत्ती अनाद ।।1।।

स्वप्रभा मोहणी देवां दयत्ता मथाया स्कंध
बाघ आरोहणी सुरां महक्का बिहंड।
चंड रक्तबीज शुंभ त्रिशुला़ं डोहणी चंडी
मंडी टेक प्रचण्डी सोहणी विश्वमंड।।2।।

गैण लागी घटा में बीज़ल़ा झल़ा रूप गाजै
इंदु कल़ा रूप छाजै छटा में अनूप ।
छोल़ा सिन्धु तंटा में म्रजादा राण रूप छाजै
राजै रुद्र जटा में तरंग गंगा रूप ।।3।।

प्रथी अम्बु तेज वायु आकाश समाणी प्रभा
बड़ां बड़ी कहाणी अनंता प्रलै बार ।
रुद्राणी ब्रह्माणी महाराणी श्री जानकी राधा
देवी त्रिहूँलोक प्राणी बांधा माया द्वार।।4।।

पदां कंज झणंकार नूपरां हीर री प्रभा
पोषाकाँ चीर री दुती अद्वती प्रकाश।
कोटि चंद कीर री मुखारबिन्द वाल़ी कान्ति
हंसै सदा सीर री रस्समी मंदहास।।5।

दाता बण मोदरी बिराजै जिका महादेवी
माला कादम्बरी सेवी भदोरै हमेश ।
आनंद री चखांवाली सच्चिदानंद री इच्छा
आनंदी कँवारी बाला सुन्दरी आदेश।।6।।

~~कवि चैनजी सांदू भदौरा

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