हाल पिया हरद्वार

आदरणीय मोहनसिंहजी रतनू री पंक्ति “हाल पिया हरिद्वार” माथै कीं दूहा -गिरधरदान रतनू दासोड़ी

पाप प्रखालण प्रेम सूं,समझ जीवण रो सार।
दीनबंधु रै दरस कज,हाल पिया हरद्वार।।१
नावण गंगा नेम सूं,धावण माधव धार।
पावन संतां परसवा,हाल पिया हरिद्वार।।२
गंगा पावन लहर गुण,सबरो करै सुधार।
जबरो तीरथ जोयबा,हाल पिया हरिद्वार।।३
कथा ग्यान हरि कीरतन,नित्त करै नर -नार।
ताप जगत रा तोड़बा,हाल पिया हरिद्वार।।४
तपसी जिथियै तापणा।,काय सुधारण कार।
चरण जिणां रा चंपवा,हाल पिया हरिद्वार।।५
देखण हर रा देवरा,भांजण भव रा भार।
जीवतड़ा ई जोयबा,हाल पिया हरिद्वार।।६
गाई कीरत ग्रंथ घण,पाई किणी न पार।
इण दाई में देखबा,हाल पिया हरिद्वार।।७
पियो घणो ई प्रेम सूं,जग बोतलियां जार।
छतो अबै मद छोडबा,हाल पिया हरिद्वार।।८
साथ भवानीसिंह नै,ज्यूं त्यूं लेय जचार।
छौल गंग मद छोडबा,हाल पिया हरिद्वार।।९
पायो औरूं पीवियो,पेख सखां सूं प्यार।
छतो अबै मद छोडबा,हाल पिया हरिद्वार।।१०
बोतल मत ना वीसरै,सो लीजै कर सार।
गंगाजल़ लावण गुणी,हाल पिया हरिद्वार।।११
बोतल मत ना वीसरै,मन मती तिल मार।
सुरा त्याग ,जल़ सुरसरी,हाल पिया हरिद्वार।।१२
तट गंगा रै तीर पै,ध्यान शपथ ले धार।
फट बोतलडी फोडबा,हाल पिया हरिद्वार।।१३
साथी कहणै रा सबै,ईशर सत आधार।
जग में पक्की जचायलै,हाल पिया हरिद्वार।।१४
~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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