श्री हडुमानजी रौ अष्टक – डॉ. शक्तिदान कविया


।।दूहा।।
गुण गहीर गिरवांण गत, वज्र सरीर विधांन।
सिंवरूँ नन्द समीर रौ, महावीर हडुमांन।।१
पृथमी चहुंकूटां प्रघळ, वधै विमळ जस बेल।
सुर हड़मत वन्दै सकळ, अतुळीबळ अजरेल।।२

।।छन्द रोमकंद।।
अतुळीबळ झेल भुजां ब्रिद ऊजळ, सायर लंघ उझेल सची
गजठेल प्रजाळण लंक तणौ गढ़, मारुत नन्दण हेल मची।
नित तेल सिंदूर चढ़ै कपिनायक, भाव अपेल सुं होय भली।
अजरेल जयो हड़ुमांन अणंकळ, बेल करे बजरंग बली।
जी, बेल रहे बजरंग बली।।१

भगतां दुख भंजण जोप महाभड़, रांम-धजा कर ओप रही।
रण में पग रोप सकै कुण रंघड़, लंघड़ क्रीत अनोप लही।
कर कोप ग्रस्यौ छिन में सुत कासब, चंचळता बळ लोप चली।
अजरेल जयो हडुमांन अणंकळ, बेल करे बजरंग बली।।२

सत रूप महाबळ संत सहायक, पायक रांम सिया प्रभणां।
विध शुद्ध उचारण व्याक्रण वायक, गायक सांम संगीत गिणां।
लख द्रोण उठाय संजीवण लायक, है वरदायक क्रीत हली।
अजरेल जयो हडुमांन अणंकळ, बेल करे बजरंग बली।।३

असुरां उर साल अबीह अप्रब्बळ, है सुर ढाल जपंत हणूं।
नख वज्र विसाल भुजा बप नेखम, भाल चखां तप तेज भणूं।
जुध लाल धजा भड़ जीत धनंजय, झाट उथाल रिमां न झली।
अजरेल जयो हडुमांन अणंकळ, बेल करे बजरंग बली।।४

सुरसा मुख फाड़ अड़ी मग सांप्रत, ताकत ताड़ सकी न तठै।
दध में कर राड़ मुंई सिंहका दब, जे कपि भार पहाड़ जठै।
रुद्र रूप पछाड़ हण्यौ अहिरावण, मोखण बंध अखाड़मली।
अजरेल जयो हडुमांन अणंकळ, बेल करे बजरंग बली ।।५

त्रिय ताप मिटे सब रोग हटै तन, जाप जप्यां नवनिद्ध जुड़ै।
निज नांम प्रताप पिसाच निसाचर, मूठ महाभय श्राप मुड़ै।
अंजनी सुत थाप उथाप अड़ीखंभ, आप जितेन्द्रिय हो असली।
अजरेल जयो हडुमांन अणंकळ, बेल करे बजरंग बली ।।६

श्रुति कुंडळ धार किरीट फबै सिर, हींडळतौ गळ हार हसै।
कपि पूंछ प्रळंब वधार पराक्रम, लार कछौटिय दिव्य लसै ।
जग पार उतार रिधू भगतां जद, प्राछत हंदिय मार पली ।
अजरेल जयो हडुमांन अणंकळ, बेल करे बजरंग बली ।।७

नित संकटमोचन नांम लियां निज, रांम कृपा अठ जांम रहै।
वरियांम प्रणाम कियां कुळ वृद्धिय, लाभ विद्या धन धांम लहै ।
इह लोक तमांम मिळै सुख आणंद, आतस घांम मिटै अगली ।
अजरेल जयो हडुमांन अणंकळ, बेल करे बजरंग बली ।।८

।।छप्पय।।
बजरंगी बळवांन, ध्यांन करतां ही धावै।
रुद्र रूप राजांन, थांन पूज्यां सुख थावै।
जांणै सकळ जिहांन, आंन कुण देवत ऐसौ ।
महावीर हडुमांन, ज्यांन रखवाळी जैसो।
आजांनबाहु सुत अंजनी, तेजवांन मारुत तनय ।
कवि शक्तिदांन कवियौ कहै, जय जय श्री हडुमांन जय।।१

।।दूहौ।।
नर अष्टक हनुमांन रौ, हित सूं पढै हमेस ।
दूठ ग्रहां री दीठ सूं, रंच न लागे रेस।।१

~~डॉ. शक्तिदान कविया 

 

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