हर दिया हाथ जिण सीस हेरलो – गीत सोहणो

।।गीत – सोहणो।।
हर दिया हाथ जिण सीस हेरलो,
निजरां आयो बीह नहीं।
दोखी मुवा पटक सिर देखो,
रीस उवां री धरी रही।।1

उबरै नाथ कृपा झल़ अगनी,
चटको विसहर नाय चलै।
पच-पच अरि थकै पिंड पूरा,
हर रै आगै नाय हलै।।2

महल अरोड़ी एकण मन सूं,
रीझ -खीझ हर एक रखै।
पछै बता करसी की पाजी?
पाण पसारै नाथ पखै।।3

पहरण नहीं जिणां रै पँगरण,
रीतो ज्यांरो उदर रहै।
नाथ महर सूं भाल़ जिकै नर,
लाट तिलोकी राज लहै।।4

नीलगगन गिणता नारेल़ी,
जाण थूकता ऊपर जिकै।
लगा चोट कीधा हर लड़छा,
तब नीं रड़क्या आंख तिकै।।5

मालक जोर मेदनी आ तो,
उजड़ी केयक वार अगै।
हर रै जची जिकण पुल़ हेरो,
लीला रचदी हाथ लगै।।6

उणरी कल़ा अपरबल आ तो,
पाया किणहिन अजै पता।
उण बिन अवर रखै कुण अणडग,
बिन थांभै आकाश बता।।7

जीव जंत जिताही जगमें,
हर नै पोखै हेक हरी।
मूरख मिनख मती मगरीजै,
खांमद -वड री बात खरी।।8

इणनै कवण लख्यो है अजतक,
निमख लखेलो अगै नहीं।
गिरधर अवर कूड़ सह गिणजै,
श्रीधर हाथां कलम सही।।9

~~गिरधरदान रतनू “दासोड़ी”

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