हिम्मत मत ना हार मानवी – गजल – कवि गिरधारी दान बारहठ (रामपुरिया)

maanvi

हिम्मत मत ना हार मानवी
कर लै खुद सूं प्यार मानवी।
थारै उठियां ही थरकैला,
आतंक-अत्याचार, मानवी।
करम किये जा फल री चिंता,
मन मांही मत धार मानवी।
दिल में जिण रै देश बसै ना,
भूमी पर वै भार मानवी।
म्हारी-थारी रै पचङे में,
मिनखपणो मत मार मानवी।
मैणत री रोटी वै मीठी,
मत रिश्वत स्वीकार मानवी।
हाथ जोङ माडे मुसकावै,
ऐ मतलब रा यार मानवी।
ताती खातां जीभ तिङैली,
खावो ठारो ठार मानवी।
खोटा करम घणा दुख देसी,
क्यूं लै गळ दो-धार मानवी।
कितरी दोरी ली आजादी,
शहीदां नै चीतार मानवी।
सिरै देश सगळै देवां सूं,
पछै गांव परिवार मानवी।
भज ले मनवा भगवत्ती ने,
होसी बेङो पार मानवी।।

~~गिरधारी दान बारहठ (रामपुरिया)

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