ईश आराधना

दोहा

पाचाली धायो प्रतख सुण आयो सज साय
चीर बधायो चौगणो जस गायो किम जाय
पाठ कीर पढतो प्रघल़ सांभल़ गणका सेव
माधव अघ सह मोचिया दीनी मुगती देव
मुरल़ीधर मेट्या मुदै लिखिया विधना लेख
समवड़ कीधो सांमल़ा विप्र सुदामो बेख
सिंधुव री करुणा संभल़ तारख तजीयो तात
मैंगल़ कज गाह मारियो वाह वसु जस बात
पख लियो पैहलाद रो संत तणी रख साख
नखां देव नरसिंघ तैं हथां हणै हरणाख

छंद रोमकंद
नखड़ै हिरणाख विडारण नागर सागर मे तजी सैज सजी
पहिल़ाद उबारण कारण पाधर भाल़ सुं आविय नाथ भजी
उण वेल़ धरा अर धूजिय अंबर थंब फटै नरसिंघ थयो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो १

भिड़िये गजगाह दधी जल़ भीतर देव करी बल़ जाब दियो
मलराड़ पछाड़ दियो गाह मैंगल़ राज हठाल़िय टेर रयो
तद तारण कुंजर त्यागिय तारख धाय सुं सांमल़ गाह ढयो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो २

जगजाल़ सुफास हरी जग जामण रामण नाथ सूं राड़ मची
दसकंध उथापण हालण दाटक सो हद राटक दुठ सची
स्रवणागढ दान विभीखण सांपण खाग खल़ां असुराण खयो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो ३

मन आस विसास कियो दिढ माधव सास हि सास सदा सिमरै
सिरिया अरदास सुणी जद सांवल़ धावत पैंड बडाल़ धरै
तद पूत विडाल़ रुखालिय त्रिकम पेख पल़ाद विसास पयो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो ४

बण बामण रूप हुवो जद बावन छाल़ण तो बल़िराज छता
पहिंहाल़ विरोचण पूत पठाविय कोतक सांप्रत कीध कता
सुरराज सुकाज कियो सिग सांमथ भेद न वेद नकू ज भयो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो ५

सबरी चुग बोर सजोर सनेहण थोरण देख विभोर थही
नित वाट निहारत तो रघुनायक माग बुहारत आस मही
पत राखिय संत तणी पुरसोतम चाखिय सो फल़ आय चयो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो ६

करजाल़ दुसासण खैंचिय कुंतल़ साथ सनेहिय छोड सबै
पँडुनार बिखारिय रोय पुकारिय आव मुरारिय बैग अबै
पट खींच अनारिय हारिय पाचत ओढण रो नकु थाह अयो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो ७

अड़ड़ै जल़ धार पड़ै ब्रज ऊपर कांत सची तण कोप कियो
हहकार पुकार अपार मची हद वास जदुपत पूर बियो
गिरिराज लियो नख धार सु गोमँद लोग अधार उबार लियो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो ८

भट भाल़ भिड़ै दल़ कौरव भारथ सारथ कारण भ्रात सही
विहंगम पुकारत आरत विट्ठल़ राड़म अंडज पोख रही
धिन तारत सांम भलां पख धारत पाल़ लियै गज घंट पयो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो ९

नरसी घर भात भर्यो नटनागर चाढण नीर सु भीर चड़ै
खड़ बाल़द गेह कबीर खल़ीगण खेत धना घर आप खड़ै
जगदीस नामा घर छाझिय झूंपड़ खीच कर्मां सूंय खूब खयो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो १०

अजमेल उदारिय नाम नारायण त्यूं गणका सुण पाठ तरी
बण सैन तणै घर सैन बिहारिय हाथ रछानिय लीध हरी
हद बात रखावण कीध हजामत कींकर काज महाराज कियो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो ११

शँखधार शँखासुर दैत सँघारण साख सदा खल़ ढाह सुणां
भगतां पण राखण हेरिय भूधर माधव मोहन नाम मुणां
गिरधारिय दान कहै गिरधारिय जारिय जग्ग जु अघ्घ जयो
रघुनाथ घणा रँग तो बड राजन साजण देव सुमोख सयो १२

रंग तनै रघुनाथ मही मरजादा मंडण
रंग तनै रघुनाथ खरदुसण सा खंडण
रंग तनै रघुनाथ अहिला मुगती अप्पी
रंग तनै रघुनाथ मुर पैंडां धर मप्पी
अणथाग थोग कीधा अलख लख न पावूं लेसरै
कवि सुजस माल़ गिरधर कहै अवधनाथ आदूस रे

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