जय तेमड़ेराय – चिरजा – कवि सोहनदान जी सिढायच

तेमडाराय

तेमडाराय

भाकरीयो मन भावणो ,जठे आवङ माँ रो थान रे |
जठे आई माँ रो धाम रे, ङुगरीयो रलियावणो ||

ऊँचे ङुगर ओर लो ज्यारी धजा उङे असमान रे |
जोत जगामग जगमगे माँ रा नामी धूरत निशान रे ||1||
ङुगरियो रलियावणो………..

पग धरिया इण पैङिया म्हारा दुखङा हुयग्या दूर रे|
दरस कर्यो जगदम्ब रो म्हारे सुख रो उग्यो सूर रे||2||
ङुगरियो रलियावणो………..

इण ङूगर पर आय कर कोई धरे रे भगत जन ध्यान रे |
आणंद उर मे ऊपजे बाने आतम होवे ओलखान रे ||3||
ङुगरियो रलियावणो………

हल तो सिन्धु हाकङो ज्यारो पानी बिन परवाण |
आवङ सोख्यो एकलां जे रो नीर न बचीओ निवाण रे ||4||
ङुगरियो रलियावणो………

भुजंग ङस्यो निज भ्रात ने अम्बा लोवङ रोक्यो भाण रे |
अमरापुर सूं आवङा माँ इमरत दीनो आण रे ||5||
ङुगरियो रलियावणो…….

मारयो राकस तेमङो माँ इण ङूगर पर आय रे |
ऊंङो दर में दाटियो माँ अधर शिला अटकाय रे ||6||
ङुगरियो रलियावणो……….

दीज्यो थारे दास ने अम्बा भगती रो वरदान रे |
सोहन चरणां शरण मे म्हारो मात राखिजे मान रे ||7||
ङुगरियो रलियावणो……

~~कवि सोहनदान जी सिढायच रातडिया

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