जल़ बिनां नाही देख जीवण

save-water-imgगीत चित इलोल़
जल़ बिनां नही देख जीवण
सैकड़ां कथ सार।
काल ही जल़ पांण कहियै
अवन जल़ आधार।
तो आधारजी आधार अवनी नीर ही आधार।।1
तोय बिन ना लगै तरवर
रसा हरियल़ रूप।
विडरूप वसुधा लगै विरँगी
धूंस बाल़ै धूप।
तो धर धूपजी धर धूप धूंसै जीव जँत नैं धूप।।2
सलिल रै नहीं बणी समवड़
चहूंकूंटां चीज।
प्राणियां वनराय पोखण
रसा रसमय रीझ।
तो रंग रीझ रे रंग रीझ रीझै नाथ दीधी रीझ।।3
बसी ढबसर सदा बसती
वारि सर कर वास।
वणिक हाटां विणज फूलै
सरण जल़ सुखरास।
तो सुखरास रे सुखरास सदियां नीर ही सुखरास।।4
नीठियो नद नीर नाडां
वसु उजड़्या वास।
थेह ज्यांरी अजै थिरचक
खड़ी दीसै खास।
तो ऐ खासजी ऐ खास खेड़ा उजड़्या के खास।।5
उदक कीमत जाणती अग
रसा राजस्थान।
घिरत समवड़ राखती घट
वरतती बहूमान।
तो बहुमानजी बहुमान वारि वरतती बहुमान।।6
सलिल पालर सँचता सत
पुरंदर परसाद
मेहमानैचारै करण मूघम
मह रखण मरजाद
तो मरजादजी मरजाद महि जल़ रैवती मरजाद।।7
पुरस साठां काढ पीता
जूण जीता जोर।
बिखम ऊड़ा बगत बीता
थया जन सब ठोर।
तो जन जोरजी जन जोर जुड़ियो बगत अब जन जोर।।8
सुनसान रैसी संबर रै बिन
बात विसवाबीस।
दुनियांण सारी कहै दिस-दिस
जल़ जठै जगदीस।
तो जगदीसजी जगदीस जाणो जल़ जठै जगदीस।।9
दीसता नहीं देव दूजा
दैण परचा पूर।
पूगता दुय देव परतख
सलिल नै इक सूर।
तो भरपूरजी भरपूर पहुमी पवाड़ा भरपूर।।10
वरदायकां वा अगै बांधी
प्रीत सरवर पाल़।
भेद बिन सब नीर भरता
समर नैं सचियाल़।
तो सचियालजी सचियाल़ सतजन अमर वै सचियाल़।।11
बूर नाडी भवन बणिया
जबर जोड़ाजोड़।
देखलो आगोर दबिया
ठालेड़ां सब ठौड़।
तो सब ठौड़जी सब ठौड़ सरवर गुमै ग्या सब ठौड़।।12
बचासो जल़ जुड़ै वसुधा
नरां राखण नाज।
आवसी हद भांत आडो
काल देखण काज।
तो कर काज रे कर काज कर मन कोड सूं ओ काज।।13
कर बूंद री अणमोल कीमत
साचपण सूं संच।
संतति सुख भोगसी सह
बात नीति बंच
तो तूं बंच रे तूं बंच बात नीतियां ऐ बंच।।14
भोजन बिन तो भल़ै भाई
टल़ै इक बे टंक।
नीर बिन नीं कदम निसरै
ऐह साचा अंक।
त़ो उर अंकजी उर अंक उरधर साचला ऐ अंक।।15
उदक बिन की काम आसी
भवन मोटा भाल़।
जोड़ियो धन विलै जासी
तोय बिन ततकाल़।
तो संभाल़ रे संभाल सतमन नीर नैं संभाल़।।16
नीपजै अन्न धरा नामी
जांण जल़ रै जोर
ऊपजै जल़ इसी अजलग
चीज नीं चहूंओर
तो चहूंओरजी चहूंओर अजलग उदक सम नी ओर।।17
समै कुसमै भीर सजसी
ताण आफत टाल़।
नीर निरमल़ राख निसदिन
भेल़ो करनैं भाल़।
तो भल भाल़रे भल भाल़ भाया राख जल़ री भाल़।।18
देख सुणिया केई दाता
महि वड -लघु मान।
दातार जल़ ओ सिरै दुनिया
दैण जीवणदान।
तो दिए दानजी दिए दान जल़ नित राखणो जन जान।।19
छाकटै बाजार रै छल़
फास फंदै फेर।
देखसो नहीं भविस दुरगत
आंखियां अंधेर।
तो अंधेरजी अंधेर आगै पीढियां अंधेर।।20
कहै गिरधर साच कवियण
कूड़ रो नह काम।
नीर बचियां नाम रैसी
नीर बिन नहीं नाम।।
तो निज नामजी निज नाम निजपण रैवसी जद नाम।।21
~~गिरधरदान रतनू दासोड़ी

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