जांभा सुजस – कवि भंवरदान माडवा “मधुकर”

jambheshwar

।।दोहा।।
अवनी जीव ऊद्धारणा, संत सुधारणा शम्भ।
विश नव जात वधारणा, जय जोगेश्वर जम्भ।।

।।छंद – त्रिभँगी।।
जन मन जयकारा, धन तन धारा, अवन उचारा अवतारा।
पिंपासर प्यारा, दीन दुलारा, पुन प्रजारा, परमारा।
तपस्या तन तारा, भव पर भारा, भल भंयकारा भूप भया।
परगट परमेश्वर, जय जांभेशवर, निज अवधेश्वर रूप नया।।

नव विसी न्याती, धर्म धराती, वर्ण विनाती विख्याती।
जम्भ देव जमाती, कर्म कराती, मेहनत भाती मन थाती।
खिति पर धन ख्याती, परमल पाती, जबरी जाती सूंप जयो।
परगट परमेश्वर, जय जांभेश्वर, निज अवधेश्वर रूप नयो।।

धर तापत धूनी, तपस्या तूनी, मन कर मूनी, मज मूनी।
जाचण जिव जूनी, खिसकत खूनी, पाप परूनी, गुण गूनी।
अणभे गत ऊनी, निरमल नूनी, चित मन चूनी, चूप चयो।
परगट प्रमेश्वर, जय जांम्भेश्वर, नित अवधेश्वर रुप नयो।।

वन संपती वेवा, दुनी फल देवा, सार अभेवा, संभरेवा।
पशु पक्षी परेवा, हिरणां हेवा, मानव ऐवा, मंज रेवा।
सुरभी कर सेवा, कोड करेवा, जन जन जेवा जूप जयो।
परगट परमेश्वर, जय जांभेश्वर, नित अवधेश्वर रूप नयो।।

मोटी कर मंसा, हर हर हंसा, तापण खंसा तातंसा।
सालां धर संसा, बार वरंसा, अढव अहिसा, अवनंसा।
समरा थल जंसा, थलवट थंसा, अंशाय नर अनूप अयो।
परगट परमेश्वर, जय जांम्भेश्वर, नित अवधेश्वर रूप नयो।।

जांभा धिन जरणा, तपसी तरणा, काव्य ऊचरणा, शुभ करणा।
सुकवी तो सरणा, विठू वरणा, भँमर चरणा चित भरणा।
सुख साज संचरणा, हर दुख हरणा, करुणा सागर रूप कयो।
परगट परमेश्वर, जय जांभेश्वर, नित अवधेश्वर रूप नयो।।

।।कलस।।
भँमर भणी शुद्ध भाव, सतगुरू तो महिमा सुणी।
अवस ऊधरणी आव, धन्य जांभा मोटा धणी।।

~~कवि भंवरदान माडवा “मधुकर”

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